आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस/आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल : दक्षिण कश्मीर के अनंतनाग जिले में बुधवार को सुरक्षाबलों और आतंकियों के बीच हुई मुठभेड़ में न्यू चंडीगढ़ के रहने वाले कर्नल मनप्रीत सिंह शहीद हो गए। 41 वर्षीय मनप्रीत सिंह मूल रूप से मोहाली जिले के गांव भड़ोंजिया के रहने वाले थे। कर्नल के शहीद होने की सूचना उनके छोटे भाई संदीप सिंह को शाम करीब 5.30 बजे फोन पर मिली थी।
इसके बाद से पूरे गांव में शोक की लहर है। हालांकि अभी तक कर्नल की मां को बेटे की शहीद होने की सूचना नहीं दी गई है। मां मनजीत कौर (68) अभी भी अपने बेटे के शहीद होने की खबर से बेखबर है। वह गांव में अपने छोटे बेटे संदीप सिंह के साथ रहती हैं। शहीद का पार्थिव शरीर शाम तक आने की उम्मीद है।
शहीद होने से दो दिन पहले ही कर्नल मनप्रीत ने भाई को फोन पर घर छुट्टी आने की सूचना दी थी, जिसको लेकर सभी खुश थे। कर्नल के पिता स्वर्गीय लखबीर सिंह भी आर्मी में सैनिक थे। शहीद का ससुराल सेक्टर 26 पंचकूला में है।
मनप्रीत सिंह 3 साल पहले ही लेफ्टिनेंट कर्नल से कर्नल पद पर पदोन्नत हुए थे। वह शादीशुदा थे। उनका 7 साल का बेटा कबीर सिंह और ढाई साल की बेटी बानी है। इसके साथ उनका एक भाई और एक बहन हैं। भाई और बहन उम्र में उनसे छोटे हैं। उनकी पत्नी सरकारी स्कूल में टीचर है। शहीद कर्नल ने केंद्रीय विद्यालय मुल्लापुर से 12वीं तक की पढ़ाई की थी।
2 साल पहले मिला था सेना पुरस्कार
शहीद कर्नल मनप्रीत सिंह 2 साल पहले सेना पुरस्कार से सम्मानित किए गए थे। वह 19 राष्ट्रीय राइफल में तैनात थे। 2021 में अंधाधुंध गोलीबारी करने वाले आतंकवादियों से इसी बटालियन ने सामना किया था। तब मनप्रीत सिंह ने आतंकवादियों को मार गिराया था। इसी बटालियन ने 2016 में आतंकवादी बुरहान वानी को मारा था।
आज शाम 4:00 बजे तक आ सकता है पार्थिव शरीर
परिवार को भारतीय सेना की तरफ से उनके शहीद होने की सूचना दी गई। शहीद मनप्रीत सिंह का पार्थिव शरीर आज शाम 4:00 बजे तक उनके पैतृक गांव पहुंच सकता है। अगर इसमें किसी प्रकार का विलंब होता है तो अंतिम संस्कार कल यानी शुक्रवार को किया जाएगा।
2003 में लेफ्टिनेंट के पद पर हुए थे भर्ती
शहीद मनप्रीत सिंह 2003 में लेफ्टिनेंट के पद पर भर्ती हुए थे। 2020 में वह कर्नल बने थे। उनके पिता अपनी रिटायरमेंट के बाद पंजाब यूनिवर्सिटी में सुरक्षाकर्मी के तौर पर काम करने लग गए थे। उनकी मृत्यु जॉब के दौरान हुई थी। इसलिए शहीद मनप्रीत सिंह के छोटे भाई संदीप सिंह को नॉन टीचिंग स्टाफ में भर्ती किया गया था। वह अभी पंजाब यूनिवर्सिटी में ही काम करते हैं।