आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस/आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल : अमेरिकी स्पेस एजेंसी NASA ने चंद्रयान-3 के लैंडर की तस्वीर शेयर की है। ये तस्वीर चांद की कक्षा में घूम रहे NASA के लूनर रिकॉनिसेंस ऑर्बिटर (LRO) ने 27 अगस्त को खींची थी। विक्रम लैंडर 23 अगस्त को शाम 6 बजकर 4 मिनट पर चंद्रमा पर उतरा था।
इससे पहले, ISRO ने विक्रम लैंडर की 3D फोटो शेयर की थी। इसरो ने X पोस्ट में लिखा- इसे देखने का असली मजा 3D चश्मे से देखने पर आएगा। वो भी रेड और सियान रंग के 3D ग्लास से। ये तस्वीर प्रज्ञान रोवर ने लैंडर से 15 मीटर दूर यानी करीब 40 फीट की दूरी से क्लिक की थी।
पहली तस्वीर जो नासा ने साझा की…
नासा ने X पोस्ट में लिखा- LRO ने चांद की सतह पर मौजूद चंद्रयान-3 के लैंडर की सैटेलाइट तस्वीर ली। नासा ने तस्वीर में लैंडर को एक बॉक्स के अंदर दिखाया है। साथ ही कहा- लैंडर के आस-पास दिख रही रोशनी लैंडर के धुएं के चांद की मिट्टी के संपर्क में आने से बनी है।
दूसरी तस्वीर, जिसे ISRO ने शेयर किया…
विक्रम लैंडर की ये तस्वीर प्रज्ञान रोवर पर लगे दो नेविगेशन कैमरों की मदद से ली गई है। इसरो ने कहा- ये 3-चैनल वाली तस्वीर है। यह असल में दो तस्वीरों का मिश्रण है। एक तस्वीर रेड चैनल पर है। दूसरी ब्लू और ग्रीन चैनल पर है। दोनों को मिलाकर ये तस्वीर बनी है। इस तस्वीर को 3D चश्मे से देखने पर विक्रम लैंडर 3D में दिखेगा।
चंद्रयान-3 के लैंडर की सॉफ्ट लैंडिंग 4 फेज में हुई थी
ISRO ने 23 अगस्त को 30 किमी की ऊंचाई से शाम 5 बजकर 44 मिनट पर ऑटोमैटिक लैंडिंग प्रोसेस शुरू की और अगले 20 मिनट में सफर पूरा कर लिया था।
चंद्रयान-3 ने 40 दिन में 21 बार पृथ्वी और 120 बार चंद्रमा की परिक्रमा की। चंद्रयान ने चांद तक 3.84 लाख किमी दूरी तय करने के लिए 55 लाख किमी की यात्रा की।
- रफ ब्रेकिंग फेज:
लैंडर लैंडिंग साइट से 750 Km दूर था। ऊंचाई 30 Km और रफ्तार 6,000 Km/hr।
ये फेज साढ़े 11 मिनट तक चला। इस दौरान विक्रम लैंडर के सेंसर्स कैलिब्रेट किए गए।
लैंडर को हॉरिजॉन्टल पोजिशन में 30 Km की ऊंचाई से 7.4 Km दूरी तक लाया गया।
- ऐटीट्यूड होल्डिंग फेज:
विक्रम ने चांद की सतह की फोटो खींची और पहले से मौजूद फोटोज के साथ कंपेयर किया।
चंद्रयान-2 के टाइम में ये फेज 38 सेकेंड का था इस बार इसे 10 सेकेंड का कर दिया गया था।
10 सेकेंड में विक्रम लैंडर की चंद्रमा से ऊंचाई 7.4 Km से घटकर 6.8 Km पर आ गई।
- फाइन ब्रेकिंग फेज:
ये फेज 175 सेकेंड तक चला जिसमें लैंडर की स्पीड 0 हो गई।
विक्रम लैंडर की पोजिशन पूरी तरह से वर्टिकल कर दी गई।
सतह से विक्रम लैंडर की ऊंचाई करीब 1 किलोमीटर रह गई
- टर्मिनल डिसेंट:
इस फेज में लैंडर को करीब 150 मीटर की ऊंचाई तक लाया गया।
सब कुछ ठीक होने पर चंद्रमा की सतह पर सॉफ्ट लैंड कराया गया।
इस ग्राफिक्स से समझिए, किस रफ्तार से चांद तक पहुंचा लैंडर…
चांद पर भारत का यह तीसरा मिशन था, पहले मिशन में पानी खोजा था
2008 में चंद्रयान-1 को लॉन्च किया गया था। इसमें एक प्रोब की क्रैश लैंडिंग कराई गई थी जिसमें चांद पर पानी के बारे में पता चला। फिर 2019 में चंद्रयान-2 चांद के करीब पहुंचा, लेकिन लैंड नहीं कर पाया। 23 अगस्त 2023 को चंद्रयान-3 चांद पर लैंड कर गया। चांद पर सकुशल पहुंचने का संदेश भी चंद्रयान-3 ने भेजा। कहा- ‘मैं अपनी मंजिल पर पहुंच गया हूं।’