आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस/आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल : लोकसभा में कांग्रेस के नेता अधीर रंजन चौधरी ने कहा है कि नए संसद भवन के उद्घाटन के दिन राजनेताओं को संविधान की जो नई कॉपियां दी गईं, उनमें समाजवादी और धर्मनिरपेक्ष शब्द नहीं हैं।

अधीर ने कहा, ‘हम जानते हैं ये शब्द 1976 में एक संशोधन के बाद जोड़े गए थे, लेकिन अगर आज कोई हमें संविधान देता है और उसमें ये शब्द नहीं हैं, तो यह चिंता की बात है।’

दरअसल, 18 सितंबर से शुरू हुए संसद के विशेष सत्र में कामकाज 19 सितंबर से शुरू हुआ। सभी सांसदों को पुरानी बिल्डिंग से नई बिल्डिंग ले जाया गया। तभी, सांसदों को संविधान की कॉपी दी गई थी।

अधीर रंजन के मुताबिक संविधान की इस कॉपी में दो शब्द हटा दिए गए हैं। जबकि BJP सरकार में कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल का कहना है कि ये शब्द मूल संविधान में नहीं थे।

कांग्रेस नेता बोले- BJP की मंशा संदिग्ध

अधीर रंजन ने भाजपा सरकार पर आरोप लगाया कि BJP की मंशा संदिग्ध है। ये बड़ी चतुराई से किया गया है। यह मेरे लिए चिंता का विषय है। मैंने इस मुद्दे को उठाने की कोशिश की, लेकिन मुझे इस मुद्दे को उठाने का मौका नहीं मिला। जब मैं इसे पढ़ रहा था, मुझे ये दो शब्द नहीं मिले। मैंने इन्हें अपने आप जोड़ा… मैंने इसे राहुल गांधी को भी दिखाया। हम संशोधन क्यों करते हैं? यह हमारे संविधान को बदलने की जानबूझकर की गई कोशिश को दर्शाता है।

कानून मंत्री बोले- ये शब्द मूल संविधान में नहीं थे

अधीर रंजन के सवाल पर कानून मंत्री अर्जुनराम मेघवाल ने कहा, ‘जब संविधान अस्तित्व में आया, तब समाजवादी और धर्मनिरपेक्ष शब्द नहीं थे। ये शब्द संविधान के 42वें संशोधन में जोड़े गए।’

नई संसद में कामकाज के पहले दिन पेश हुआ महिला आरक्षण बिल

नई संसद में कामकाज के पहले दिन यानी 19 सितंबर को लोकसभा में महिला आरक्षण बिल (नारी शक्ति वंदन विधेयक) पेश किया गया। इस बिल के मुताबिक, लोकसभा और राज्यों की विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33% रिजर्वेशन लागू किया जाएगा।

लोकसभा की 543 सीटों में से 181 महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी। ये रिजर्वेशन 15 साल तक रहेगा। इसके बाद संसद चाहे तो इसकी अवधि बढ़ा सकती है।