आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस/आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल : देश के कई शहरों में बुधवार को जन्माष्टमी मनाई गई। रात 12 बजे मंदिरों और घरों में लोगों ने भगवान कृष्ण की पूजा की। हालांकि, मथुरा के कृष्ण जन्मभूमि मंदिर समेत देश के कई बड़े मंदिरों में आज (7 सितंबर) को जन्माष्टमी मनाई जाएगी। इन मंदिरों में वृंदावन में बांके बिहारी और द्वारका में द्वारकाधीश मंदिर शामिल हैं।
इन मंदिरों में 7 और 8 सितंबर की दरमियानी रात 12 बजे श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव होगा। जन्माष्टमी उत्सव के लिए इन सभी मंदिरों को सुंदर रोशनी से सजाया गया है। नोएडा, दिल्ली समेत देश के तमाम इस्कॉन मंदिरों में रात से ही भजन-पूजन चल रहा है। आज पूरे दिन मंदिरों में पूजा और उत्सव जारी रहेगा।
उज्जैन के सांदीपनि आश्रम में जन्माष्टमी बुधवार को मनाई गई। इस दौरान कान्हा का नींबू और भुट्टे से शृंगार किया गया। वहीं, देशभर में स्कूलों में बच्चे कान्हा की ड्रेस में पहुंचे। कई जगह मटकी फोड़, दही हांडी के इवेंट हुए। वहीं केरल में उरियादी मनाई गई।
गुजरात के राजकोट में मंगलवार से ही जन्माष्टमी का मेला शुरू हो गया है। ये मेला 9 सितंबर तक जारी रहेगा। महाराष्ट्र में मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने इस साल दही हांडी उत्सव के लिए प्रो गोविंदा नाम से एक कॉम्पिटिशन आयोजित किया है, जिसमें जीतने वाले को कैश प्राइज दिया जाएगा।
त UP के जेल मंत्री धर्मवीर प्रजापति बुधवार को बांके बिहारी मंदिर पहुंचे। उन्होंने मंदिर प्रशासन को बांके बिहारी जी के लिए ड्रेस सौंपा। इसे बंदियों ने दिन रात मेहनत करके 15 दिन में तैयार किया है। रेशम के धागे से बनी यह ड्रेस 24 मीटर कपड़े से बनी है। जो हल्के पीले रंग की है। जन्माष्टमी पर इसे भगवान कृष्ण को पहनाया जाएगा। स्वीरों में देखिए 6 सितंबर को मनाई गई जन्माष्टमी का सेलिब्रेशन…
बनारस में बुधवार को मनाई गई जन्माष्टमी
बनारस में जन्माष्टमी 6 सितंबर को ही मनाई गई। हिंदू विश्वविद्यालय के ज्योतिष विभाग के डीन प्रो. गिरिजाशंकर शास्त्री का कहना है कि व्रत और पर्वों की तारीख तय करने के लिए धर्म सिंधु और निर्णय सिंधु नाम के ग्रंथों की मदद ली जाती है। इन दोनों ही ग्रंथों में जन्माष्टमी के लिए कहा गया है कि जब आधी रात में अष्टमी तिथि और रोहिणी नक्षत्र हो, तब कृष्ण जन्मोत्सव मनाएं। 6-7 सितंबर की रात में कृष्ण जन्म पर्व मनाएं।
ज्यादातर त्योहार दो दिन क्यों होते हैं?
ऐसा इसलिए होता है क्योंकि हिंदू पंचांग की तिथियां अंग्रेजी कैलंडर के मुताबिक नहीं होतीं। अक्सर तिथियां दोपहर या शाम से शुरू होकर अगले दिन तक होती हैं। जिस तिथि में दिनभर व्रत के बाद पूजन का महत्व होता है, वे ज्यादातर उदया तिथि में मनाई जाती हैं।
जिन तिथियों में रात की पूजा का महत्व ज्यादा होता है, उनमें उदया तिथि का महत्व नहीं देखा जाता। जैसे दीपावली में अगर अमावस्या एक दिन पहले ही शुरू हो गई हो तो अगले दिन उदया तिथि की अमावस्या की बजाय एक दिन पहले की अमावस्या पर रात में लक्ष्मी पूजन किया जाएगा।
श्रीकृष्ण जन्माष्टमी दो दिन, आज पूजा के लिए 3 मुहूर्त, जानिए कैसे करें व्रत और श्रीकृष्ण पूजन की पूरी विधि
श्रीकृष्ण जन्माष्टमी आज और कल, दोनों ही दिन मनेगी। आज मनाने वालों के लिए श्रीकृष्ण पूजा के 3 मुहूर्त हैं। 7 सितंबर को 4 मुहूर्त रहेंगे। आज सर्वार्थसिद्धि मुहूर्त के साथ पांच राजयोग में श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव मनेगा। अष्टमी तिथि 6 सितंबर को दोपहर करीब 3.30 बजे शुरू होगी और 7 सितंबर को शाम 4 बजे तक रहेगी। श्रीकृष्ण का जन्म अष्टमी तिथि की रात में हुआ था, इसलिए ज्योतिषियों और ग्रंथों का कहना है 6 को जन्माष्टमी मनाएं।