आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस/आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल: आंध्र प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और TDP चीफ चंद्रबाबू नायडू को CID ने 9 सितंबर को 371 करोड़ रुपए के स्किल डेवलपमेंट स्कैम में गिरफ्तार किया था। इसके खिलाफ चंद्रबाबू के वकीलों ने हाईकोर्ट में दो याचिकाएं लगाई।
बुधवार को इस पर सुनवाई हुई। आंध्र हाईकोर्ट ने ACB कोर्ट की कार्यवाही पर अंतरिम रोक लगा दी है। साथ ही CID को नायडू को 18 सितंबर तक हिरासत में न लेने का आदेश दिया। हालांकि नायडू ज्यूडिशियल कस्टडी में रहेंगे। इस मामले पर अगली सुनवाई 19 सितंबर को होगी।
नायडू की गिरफ्तारी के बाद से उनके समर्थक लगातार विरोध जता रहे हैं। ऐसे ही एक कार्यकर्ता ने 12 सितंबर को विशाखापत्तनम जाने वाली फ्लाइट के अंदर विरोध प्रदर्शन किया। सोशल मीडिया पर सामने आए एक वीडियो में अदारी किशोर नाम का शख्स विमान के अंदर ‘लोकतंत्र बचाओ’ बैनर हाथ में लिए खड़ा है। आंध्रप्रदेश पुलिस ने TDP कार्यकर्त्ता को एयरपोर्ट से गिरफ्तार किया।
चंद्रबाबू नायडू कि गिरफ्तारी के बाद अब तक की टाइमलाइन
9 सितंबर : पूर्व CM नायडू को CID ने 371 करोड़ रुपए के स्किल डेवलपमेंट स्कैम में गिरफ्तार किया।
10 सितंबर: चंद्रबाबू नायडू को विजयवाड़ा में भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) अदालत में पेश किया। फिर अदालत ने उन्हें 23 सितंबर तक 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में भेज दिया।
11 सितंबर : TDP कार्यकर्ताओं ने CM चंद्रबाबू नायडू की गिरफ्तारी और न्यायिक हिरासत के खिलाफ चित्तूर में विरोध प्रदर्शन किया। इसी दिन पुलिस ने चित्तूर जिले में TDP एमएलसी कंचेरला श्रीकांत सहित कई पार्टी नेताओं को हिरासत में लेने की भी कोशिश की।
12 सितंबर : TDP ने पूरे राज्य में बंद का आह्वान किया है। आंध्र प्रदेश पुलिस ने मंगलवार को पूरे राज्य में धारा 144 लागू कर दी है।
TDP कार्यकर्ताओं ने राज्य में प्रदर्शन किया, YSRCP कार्यकर्ताओं ने पटाखे फोड़े
चंद्रबाबू की गिरफ्तारी के विरोध में तेलुगु देशम पार्टी ने राज्य में बंद बुलाया था। कार्यकर्ताओं ने जगह-जगह प्रदर्शन किया। वहीं, सत्ताधारी पार्टी YSRCP के कार्यकर्ताओं ने चंद्रबाबू की गिरफ्तारी को लेकर जश्न मनाया। कई जगहों पर रविवार रात पटाखे फोड़े गए।
क्या है स्किल डेवलपमेंट घोटाला
साल 2016 में तत्कालीन CM चंद्रबाबू नायडू ने बेरोजगार युवाओं को स्किल ट्रेनिंग देने के तहत आंध्र प्रदेश स्टेट स्किल डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन (APSSDC) की स्थापना की थी।
APSSDC की 3,300 करोड़ के प्रोजेक्ट के लिए TDP सरकार ने सीमेंस इंडस्ट्री सॉफ्टवेयर इंडिया लिमिटेड और डिजाइन टेक सिस्टम्स प्राइवेट लिमिटेड की ग्रुप कंपनियों के साथ एक MoU साइन किया।
इस करार के तहत सीमेंस इंडस्ट्री सॉफ्टवेयर इंडिया को स्किल डेवलपमेंट के लिए 3,300 करोड़ की लागत से छह एक्सिलेंस सेंटर स्थापित करना था।
राज्य सरकार को प्रोजेक्ट के कुल लागत का 10 फीसदी भुगतान करना था, जबकि मदद के रूप में बाकी राशि सीमेंस और डिजाइन टेक को देना था।
CID ने जांच में कई खुलासे किए
CID ने अपनी जांच में पाया कि राज्य कैबिनेट से इस परियोजना को मंजूरी नहीं थी। इसके बावजूद बिना टेंडर के प्रोजेक्ट शुरू किया गया। MoU के तहत सीमेंस कंपनी को अपनी तरफ से प्रोजेक्ट में इन्वेस्ट करना था। हालांकि, कंपनी ने अपनी तरफ से कुछ भी निवेश नहीं किया।
इसके उलट राज्य सरकार की तरफ से आवंटित 371 करोड़ रुपए विभिन्न शेल कंपनियां- एलाइड कंप्यूटर्स, स्किलर्स इंडिया प्राइवेट लिमिटेड, नॉलेज पोडियम, कैडेंस पार्टनर्स और ईटीए ग्रीन्स में बांट दीं। इसके लिए फर्जी दस्तावेज तैयार किए गए।
CID ने एक प्रेस रिलीज में बताया कि साल 2018 में एंटी करप्शन ब्यूरो को इस घोटाले की शिकायत मिली थी। हालांकि, तब सत्ता में बैठे लोगों ने जांच रोकने की कोशिश की और राज्य सचिवालय से जरूरी डॉक्यूमेंट्स हटा दिए। वर्तमान सरकार की जांच से पहले GST इंटेलिजेंस विंग और IT डिपार्टमेंट भी घोटाले की जांच कर रहे थे।