आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस/आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल : हिमाचल में अडाणी ने पहली बार मंडियों में जाकर सेब की खरीद शुरू कर दी है। कम फसल और बागवानों के बायकॉट की वजह से अडाणी के हिमाचल में चल रहे तीन CA (कंट्रोल एटमॉस्फेयर) स्टोर खाली रह गए है। पांच सितंबर तक कुल क्षमता का दो फीसदी सेब भी अडाणी को नहीं मिल पाया है। इन्हें भरने के लिए अब अडाणी प्रबंधन ने मंडियों में ओपन बोली लगाकर सेब खरीदने का निर्णय लिया है।

अडाणी के प्रवक्ता ने बताया कि रोहड़ू, सैंज और बिथल में उनके CA स्टोर है। इन स्टोर के साथ लगती मंडियों में ओपन बोली में उनके कर्मचारी पार्टिसिपेट करेंगे और सेब खरीदेंगे। ऐसा करके तीनों स्टोर को भरा जाएगा। हिमाचल में अडाणी 14-15 साल से सेब की खरीद कर रहा है। यह पहला मौका है जब अडाणी समूह को मंडियों में उतरकर सेब खरीदना पड़ रहा है।

पिछले साल तक अडाणी के स्टोर के बाहर लगी रहती थी लाइनें

पिछले सालों के दौरान अडाणी के स्टोर के बाद सेब से लदी गाड़ियों की लंबी-लंबी कतारे लगी रहती थी। ऊंचे क्षेत्रों के बागवान अडाणी को सेब देने के लिए तरसते थे, क्योंकि मंडियों की तुलना में अडाणी के पास पेमेंट का भुगतान जल्दी होता है और पैकिंग का खर्च भी बचता है। इस बार ऐसा नहीं है।

अडाणी से बागवानों के मुंह मोड़ने का बड़ा कारण

अडाणी से बागवानों के मुंह मोड़ने की बड़ी वजह प्रदेश की मंडियों में भी सेब का किलो के हिसाब से बिकना है। बीते साल तक बागवानों को यह पता नहीं चल पाता था कि उनका सेब कितने रुपए किलो बिका है, क्योंकि पूर्व में सेब वजन के हिसाब से नहीं बल्कि गड्ढ में बिकता था। कुछ बागवान 20 किलो की पेटी में 35 से 40 किलो तक सेब भर देते थे।

इससे मंडियों में बागवानों को हर साल करोड़ों रुपए बड़ा नुकसान हो रहा था। कांग्रेस सरकार ने प्रदेश में पहली बार सेब को किलो के हिसाब से बेचने की व्यवस्था की। इससे बागवान समझ पाए कि ओपन मार्केट में क्या रेट है और अडाणी क्या रेट दे रहा है।

जब मार्केट रेट 150 था तो अडाणी ने 96 का रेट किया ओपन

अडाणी ने अगस्त के आखिरी सप्ताह में सेब के रेट ओपन किए। तब प्रीमियम सेब का अडाणी ने 96 रुपए रेट खोला, जबकि ओपन मार्केट में सेब 150 रुपए प्रति किलो तक बिक रहा था। इससे बागवान समझ गए कि अडाणी ने कम रेट दिए है। इसलिए बागवानों ने अडाणी का बहिष्कार करने का निर्णय लिया।

सोशल मीडिया पर भी अडाणी के खिलाफ बागवानों का रोष फूटा। हालांकि इसके बाद अडाणी ने दो बार सेब के रेट भी बढ़ाए और प्रीमियम सेब का रेट 110 रुपए तक किया। फिर भी अधिकांश बागवान अडाणी को सेब देने को तैयार नहीं है। अब अडाणी समूह मंडियों में कूद गया है।

चार-पांच सालों से मार्केट रेट गिराने की साजिश के लगते रहे आरोप

बागवान अडाणी पर पिछले चार-पांच सालों से सेब के मार्केट गिराने के आरोप लगाते रहे हैं। हकीकत में भी पिछले कुछ सालों के दौरान जब भी अडाणी ने रेट ओपन किए है तो मार्केट हर बार गिरी है, जबकि अडाणी के रेट ओपन करने से मार्केट कम नहीं बल्कि बढ़नी चाहिए, क्योंकि इनका सेब मार्केट में न जाकर चार-पांच महीने स्टोर में रहता है।