आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस/आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल : चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग अगले हफ्ते जोहान्सबर्ग में होने वाले ब्रिक्स देशों के समिट में शामिल होने के लिए साउथ अफ्रीका जाएंगे। चीन के विदेश मंत्रालय के मुताबिक जिनपिंग साउथ अफ्रीका की राजकीय यात्रा भी करेंगे। ब्रिक्स समिट में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी शामिल होंगे। ऐसे में समिट के दौरान दोनों नेताओं की मुलाकात लगभग तय मानी जा रही है।
चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता हुवा चुनयिंग ने कहा कि शी जिनपिंग अपनी 21 से 24 अगस्त की यात्रा पर साउथ अफ्रीका के राष्ट्रपति सिरिल रामाफोसा के साथ द्विपक्षीय वार्ता करेंगे। चीन ब्रिक्स संगठन का अहम सदस्य है। चीन के अलावा इस समूह में भारत, रूस, ब्राजील और साउथ अफ्रीका भी शामिल हैं। इस समूह का उद्देश्य दुनिया की तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था वाले देशों को साथ लाना है।
समिट में हिस्सा लेने नहीं जाएंगे पुतिन
साउथ अफ्रीकी अधिकारियों के मुताबिक रूस के राष्ट्रपति व्लादिमिर पुतिन इस समिट में शामिल होने के लिए साउथ अफ्रीका नहीं जाएंगे। पुतिन के खिलाफ इंटरनेशनल क्रिमिनल कोर्ट ने अरेस्ट वारेंट जारी किया है।
पुतिन इस समिट में व्यक्तिगत तौर पर शामिल न होने वाले एकमात्र नेता होंगे। न्यूज एजेंसी एपी की रिपोर्ट के मुताबिक इससे पुतिन की छवि पर असर पड़ सकता है। क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेश्कोव ने बताया कि राष्ट्रपति पुतिन ने इस समिट में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से जुड़ने का फैसला किया है।
कोविड के बाद पहली बार साथ आएंगे सदस्य देश
2019 के बाद पहली बार ब्रिक्स देशों के नेता मंच पर एक साथ आएंगे। इससे पहले कोविड के कारण ये समिट ऑनलाइन किया जा रहा था। रूस-यूक्रेन जंग,साउथ अफ्रीका की गिरती हुई अर्थव्यवस्था और भारत-चीन के बीच तनाव के कारण इस समूह की प्रांसगिकता बढ़ गई है।
ब्राजील के राष्ट्रपति लूला डा सिल्वा ने कहा कि वो इस गुट में और देशों को जोड़ने के पक्ष में हैं और इसके लिए समिट में बात भी रखेंगे। ब्राजील के विदेश मंत्री माउरो विएइरा ने कहा कि 20 से अधिक देशों ने औपचारिक तौर पर ब्रिक्स से जुड़ने के लिए अप्लाई किया है। आवेदन करने वाले देशों में अर्जेंटीना, संयुक्त अरब अमीरात, साउदी अरब, इंडोनेशिया, ईरान और वेनेजुएला शामिल हैं।
रूस और चीन को अलग-थलग करने की अमेरिका और यूरोपीय यूनियन की कोशिश के मद्देनजर, दोनों ही देश विकासशील देशों में अपना आर्थिक असर बढ़ाना चाहते हैं। इसके लिए चीन ने कदम उठाने भी शुरू कर दिए हैं। चीन,न्यू डेवलपमेंट बैंक या ब्रिक्स बैंक के जरिए ब्राजील और दुनिया के बाकी हिस्सों में इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट को फंड कर रहा है। चीन इस बैंक को फंड करता है।