आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस/आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल : केंद्र सरकार ने लैपटॉप, टैबलेट और पर्सनल कम्प्यूटर के इंपोर्ट के लिए लाइसेंस अनिवार्य करने की तारीख 31 अक्टूबर 2023 तक बढ़ा दी है। सरकार ने शुक्रवार देर रात को एक नोटिफिकेशन जारी कर इस बात की जानकारी दी।
डायरेक्टोरेट जनरल ऑफ फॉरेन ट्रेड (DGFT) की नोटिफिकेशन के अनुसार, प्रतिबंधित कंसाइनमेंट को 31 अक्टूबर तक लाइसेंस के बिना इंपोर्ट की मंजूरी दी जा सकती है, लेकिन 1 नवंबर 2023 से ऐसे सभी प्रोडक्ट को इंपोर्ट करने के लिए वैध लाइसेंस की जरूरत होगी।
इससे पहले सरकार ने गुरुवार को नोटिफिकेशन जारी करते हुए लैपटॉप, टैबलेट और पर्सनल कम्प्यूटर के इंपोर्ट पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दिया था।
सेफ्टी कंसर्न के कारण सरकार ने उठाया ये कदम
लैपटॉप, टैबलेट और पर्सनल कंप्यूटर के इंपोर्ट पर प्रतिबंध लगाने और केवल वैध लाइसेंस के माध्यम से इंपोर्ट की अनुमति देने का सरकार का यह नया कदम सेफ्टी कंसर्न के कारण है।
इसके साथ ही सरकार को इससे मेक इन इंडिया प्रोग्राम और लोकल मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। इस फैसले से लोकल मैन्युफैक्चरर्स और ऐसी विदेशी कंपनियों को फायदा होगा, जो देश में लगातार प्रोडक्शन कर रहे हैं, लोकल सप्लाई को बढ़ावा दे रहे हैं और दूसरे देशों को भी एक्सपोर्ट कर रहे हैं। डेल और एचपी उन कंपनियों में से हैं जिनकी भारत में पहले से ही मैन्युफैक्चरिंग फैसिलिटीज हैं।
बैगेज में इन आइटम्स को ले जाने पर प्रतिबंध नहीं
मिनिस्ट्री ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री ने नोटिफिकेशन में कहा था- HSN 8741 के तहत आने वाले लैपटॉप, टैबलेट, ऑल-इन-वन पर्सनल कम्प्यूटर और अल्ट्रा स्मॉल फॉर्म फैक्टर कम्प्यूटर और सर्वर का इंपोर्ट प्रतिबंधित होगा।’ हालांकि यह प्रतिबंध उन पैसेंजर्स पर लागू नहीं होगा जो अपने बैगेज में इन आइटम्स को साथ ले जा रहे हैं।
इसके अलावा एक लैपटॉप, टैबलेट, ऑल-इन-वन पर्सनल कम्प्यूटर या अल्ट्रा स्मॉल फॉर्म फैक्टर कम्प्यूटर इंपोर्ट करने पर भी ये प्रतिबंध लागू नहीं होगा। इसमें ई-कॉमर्स पोर्टल से पोस्ट या कूरियर के माध्यम से खरीदी गई वस्तुएं भी शामिल हैं। इंपोर्ट पर जो फीस लगती है वो देनी होगी। फॉरेन ट्रेड पॉलिसी में बदलाव करते हुए केंद्र सरकार ने यह फैसला लिया।
विश्वसनीय हार्डवेयर और सिस्टम सुनिश्चित करना इस कदम का उद्देश्य
इससे पहले इलेक्ट्रॉनिक्स और IT राज्य मंत्री राजीव चंद्रशेखर ने कहा था कि नए नियम के लागू होने से पहले एक ट्रांजिशन अवधि होगी। इस कदम के पीछे का उद्देश्य विश्वसनीय हार्डवेयर और सिस्टम सुनिश्चित करना, आयात निर्भरता को कम करना और इस श्रेणी के प्रोडक्ट के घरेलू एमएफजी को बढ़ाना है।
इसके जरिए यह सुनिश्चित करना है कि भारत का टेक्नोलॉजी इको-सिस्टम केवल विश्वसनीय और सत्यापित प्रोडक्ट का यूज करता है।
R&D जैसे काम के लिए इंपोर्ट पर मिलेगी छूट
वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय ने कहा था कि रिसर्च एंड डेवलपमेंट, टेस्टिंग, इवैल्यूएशन, रिपेयरिंग एंड री-एक्सपोर्ट और प्रोडक्ट डेवलपमेंट के मकसद से हर कन्साइनमेंट में 20 ऐसे आइटम्स इंपोर्ट करने पर छूट रहेगी। इन इंपोर्ट्स को केवल इस आधार पर अनुमति दी जाएगी कि उनका इस्तेमाल इन्हीं उद्देश्यों के लिए किया जाएगा। इन प्रोडक्ट्स को बेचा नहीं जा सकेगा।
मंत्रालय ने कहा कि एक बार मकसद पूरा हो जाने पर प्रोडक्ट्स को यूज से पहले नष्ट या फिर री-एक्सपोर्ट करना होगा। नोटिफिकेशन में ये भी कहा गया कि रेस्ट्रिक्टेड प्रोडक्ट के रिपेयर और रिटर्न के लिए किसी भी तरह के लाइसेंस की जरूरत नहीं होगी।