आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस/आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल : राहुल गांधी इन दिनों अमेरिका के 6 दिन के दौरे पर हैं। गुरुवार को उन्होंने वॉशिंगटन डीसी के नेशनल प्रेस क्लब में मीडिया के सवालों के जवाब दिए। इस दौरान केरल में इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (UML) से गठबंधन को लेकर राहुल ने कहा- मुस्लिम लीग पूरी तरह से सेक्युलर पार्टी है। विपक्ष एकजुट हो रहा है। हम सभी विपक्षी पार्टियों से बात कर रहे हैं। इस संबंध में काफी अच्छा काम हो रहा है।

राहुल ने कहा- कई जगह ऐसी हैं जहां हम विपक्ष के साथ मुकाबला कर रहे हैं। ऐसे में हमें कई मुद्दों पर एक राय बनानी होगी, लेकिन मुझे विश्वास है कि हम चुनाव में साथ जरूर आएंगे। सांसदी जाने के सवाल पर उन्होंने कहा- मुझे 1947 के बाद मानहानि के मामले में सबसे बड़ी सजा मिली है। मैंने संसद में अडाणी को लेकर स्पीच दी थी, जिसकी वजह से मुझे डिस्क्वालिफाई कर दिया गया।

BJP बोली- ऐसा कहना राहुल की मजबूरी

मुस्लिम लीग को लेकर राहुल के बयान पर BJP ने पलटवार किया है। BJP नेता अमित मालवीय ने कहा- जिन्ना की मुस्लिम लीग पार्टी धार्मिक आधार पर भारत के बंटवारे के लिए जिम्मेदार थी। ये पार्टी राहुल के मुताबिक सेक्युलर पार्टी है। वायनाड में अपनी स्वीकार्यता बनाए रखने के लिए ऐसा कहना उनकी मजबूरी है।

अब पढ़िए राहुल गांधी की प्रेस कॉन्फ्रेंस से जुड़ी बड़ी बातें…

  1. रूस-यूक्रेन जंग पर कांग्रेस BJP के साथ

यहां उनसे सवाल किया गया कि रूस और यूक्रेन जंग को लेकर कांग्रेस का रूस के लिए क्या स्टैंड है। इसके जवाब में राहुल ने कहा कि रूस को लेकर जो BJP का रुख है, वैसा ही रुख कांग्रेस का होगा। उन्होंने कहा कि रूस और भारत के बीच जो रिश्ता है, उसे नकारा नहीं जा सकता है। इसलिए हमारी पॉलिसी सरकार जैसी ही होती।

  1. भारतीय तंत्र को कमजोर किया जा रहा

भारतीय तंत्र और व्यवस्थाएं बहुत मजबूत है, लेकिन इस सिस्टम को कमजोर कर दिया गया है। अगर लोकतांत्रिक तरीके से बातचीत की जाए, तो सारे मसले खुद सुलझ जाएंगे। कांग्रेस पार्टी ने संस्थानों की अवधारणा की। हम उन्हें अपनी संस्था के रूप में नहीं देखते हैं हम उन्हें राज्य की संस्था के रूप में देखते हैं हमने सुनिश्चित किया कि इन संस्थाओं में स्वतंत्रता और तटस्थता रहे।

  1. भारत में प्रेस आजाद नहीं, लोग बेरोजगारी-महंगाई से परेशान

भारत में प्रेस की स्वतंत्रता कमजोर होती जा रही है और यह बात सभी जानते हैं। मुझे लगता है कि लोकतंत्र के लिए प्रेस की स्वतंत्रता और आलोचना को सुनना जरूरी है। मैं जो भी सुनता हूं उस पर विश्वास नहीं करता।