सीएनएन सेंट्रल न्यूज़ एंड नेटवर्क– इंटीग्रेटेड ट्रेड– न्यूज़ भोपाल: सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार (14 मई) को भीमा-कोरेगांव केस में महाराष्ट्र के एक्टिविस्ट गौतम नवलखा को जमानत दे दी है। जस्टिस एमएम सुंदरेश और जस्टिस एसवीएन भट्टी की बेंच ने कहा- हाईकोर्ट के जमानत के ऑर्डर पर स्टे की अवधि बढ़ाने का हमें कोई कारण नजर नहीं आ रहा है। पूरे मामले की सुनवाई खत्म होने में तो कई साल बीत जाएंगे।
कोर्ट ने कहा- गौतम नवलखा चार साल से ज्यादा समय से जेल में हैं। इनके खिलाफ अभी तक आरोप तय नहीं किए गए हैं।
दरअसल, नवलखा पर 2017 में पुणे में एल्गार परिषद के आयोजित कार्यक्रम में भड़काऊ भाषण देने का आरोप है। इसके कारण ही भीमा-कोरेगांव में हिंसा हुई थी। हिंसा में एक व्यक्ति की मौत हुई थी, जबकि कई घायल हुआ था। इस मामले में नवलखा को बॉम्बे हाईकोर्ट ने जमानत दी थी, जिसके खिलाफ NIA ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका लगाई थी। सुप्रीम कोर्ट ने बॉम्बे हाईकोर्ट के आदेश पर स्टे लगा दिया था।
मंगलवार जमानत देते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा पूरे मामले पर विस्तार से चर्चा किए बना हम हाईकोर्ट के फैसले पर स्टे लगाने का कोई औचित्य नहीं है। नवलखा को जमानत दी जाती है, लेकिन उन्हें हाउस अरेस्ट के दौरान मिली सुरक्षा के लिए 20 लाख रुपए चुकाने होंगे।