आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस/आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल : अरब सागर से उठा ‘बिपरजॉय’ तूफान पाकिस्तान की ओर बढ़ चला है। समुद्र में जिस जगह यह तूफान पनपा, उससे ठीक दक्षिण में मानसून अटका हुआ था। इसलिए अब मानसून के लिए रास्ता खुल गया है। मौसम विभाग ने बताया कि मानसून कल यानी 9 जून को केरल पहुंच सकता है। हालांकि, यह पूरे 8 दिन लेट है, लेकिन अब इसकी रफ्तार बढ़ सकती है।

केरल के समानांतर जिन जगहों से तूफान गुजरा, वहां बादल छा चुके हैं। इसलिए बुधवार को केरल और लक्षद्वीप में भारी बारिश हुई। बारिश गुरुवार को भी जारी रह सकती है। दूसरी ओर, बंगाल की खाड़ी में मानसूनी बादलों की मोटी परत जम चुकी है। इसके चलते मानसून की पूर्वी रेखा अगले 24 घंटे में पूर्वोत्तर के राज्यों तक पहुंच सकती है।

8 जून तक 8 राज्यों को कवर कर लेता है मानसून

मानसून आमतौर पर 8 जून तक देश के 8 राज्यों, यानी 35% भूभाग को कवर कर लेता है। दरअसल, भारतीय मौसम विभाग जिन 14 केंद्रों पर दर्ज होने वाली बारिश के आधार पर मानसून की घोषणा करता है, उनमें से 60% केंद्रों पर दो दिन में लगातार 2.5 मिमी बारिश होनी जरूरी है जो अब तक नहीं हुई है।

जैसे ही त्रिशूर, थालासेरी, कुडुलू, मंगलौर आदि में बारिश के मापदंड पूरे होंगे, मानसून की घोषणा कर दी जाएगी। मौसम विभाग शुक्रवार सुबह तक मानसून की औपचारिक घोषणा कर सकता है।

दिल्ली: हीटवेव की संभावना नहीं, मगर पारा बढ़ेगा

राजधानी दिल्ली में अगले चार से पांच दिन तक हीटवेव की संभावना नहीं है। हालांकि, अधिकतम तापमान में धीरे-धीरे बढ़ोतरी जारी रहेगी। मौसम केंद्र सफदरजंग में बुधवार को न्यूनतम तापमान सामान्य से दो डिग्री कम 25.2 डिग्री सेल्सियस और अधिकतम तापमान 38.4 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो सामान्य से दो डिग्री कम है।

कश्मीर: ओले-बारिश से सेब के बागान तबाह, फल-सब्जियों काे 70% नुकसान

जम्मू-कश्मीर में इस साल बारिश और ओले गिरने ने सेब के बागान और अन्य मौसमी फलों-सब्जियों काे भारी नुकसान पहुंचा है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, सेब और अन्य फसलों को 70-80% नुकसान का अनुमान है। इससे आने वाले समय में सेब और महंगे होंगे, क्योंकि देशभर में 70% सेब की आपूर्ति कश्मीर से होती है।

बागवानी और कृषि विभाग की 25 मई को जारी रिपोर्ट से पता चला है कि उत्तरी कश्मीर के बारामूला और कुपवाड़ा जिलाें में बर्फबारी ने सबसे ज्यादा कहर बरपाया है। बारामूला और कुपवाड़ा कश्मीर में सेब के प्रमुख उत्पादक जिले हैं। ओले गिरने से सेब, अखरोट, चेरी, बेर और नाशपाती की पत्तियों-फूलों के साथ ही टहनियों को भी नुकसान पहुंचा है।