आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस/आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल: नासा पहली बार किसी दूसरे ग्रह से रॉकेट लॉन्च करने की तैयारी कर रहा है। मार्स सैंपल रिटर्न मिशन के तहत नासा मार्स एस्सेंट व्हीकल (MAV) को मंगल ग्रह से लॉन्च करेगा, जो फिर वहां से इकट्ठा किए गए सैंपल्स को धरती पर पहुंचाने में मदद करेगा। इसके लिए MAV की टीम ने सॉलिड रॉकेट मोटर के पहले और दूसरे स्टेज की टेस्टिंग कर ली है, जो सफल रही।

नासा के मार्शल स्पेस सेंटर से मैनेज किए जा रहे MAV को जून 2028 में लॉन्च किया जाएगा। मंगल ग्रह से सैंपल 2030 तक धरती पर पहुंच सकते हैं। इन सैंपल्स को फिलहाल नासा का पर्सीवरेंस रोवर इकट्ठा कर रहा है। ये पहला मौका होगा जब किसी और ग्रह से सैंपल पृथ्वी पर लाए जाएंगे। इनकी जांच के दौरान मंगल पर जीवन की संभावना खोजने की कोशिश की जाएगी।

रॉकेट की दोनों मोटर की टेस्टिंग सफल रही

मंगल ग्रह से सैंपल रिटर्न मिशन की कामयाबी के लिए MAV के डिजाइन, कंपोनेंट से जुड़ी सभी टेस्टिंग और रिव्यू किए जा रहे हैं। इसे पृथ्वी से सैंपल रिट्रीवल लैंडर के जरिए लॉन्च किया जाएगा, जिसे मंगल पर पहुंचने में करीब 2 साल का समय लगेगा। इसके बाद अगले 1 साल में ये पर्सीवेंस रोवर से सैंपल लेगा।

इन्हें रॉकेट की नाक में स्टोर किया जाएगा। सैंपल ट्रांसफर होने के बाद MAV को मंगल से लॉन्च किया जाएगा, जो ग्रह की ऑर्बिट में पहुंचकर सैंपल कंटेनर को अर्थ रिटर्न ऑर्बिटर को सौंपेगा। यही ऑर्बिटर सैंपल्स लेकर पृथ्वी लौटेगा।

क्या है दोनों मोटर का काम

MAV को 2 सॉलिड रॉकेट मोटर SRM1 और SRM2 के जरिए लॉन्च किया जाएगा। SRM1 के जरिए रॉकेट को मंगल ग्रह की सतह से ऊपर उठाया जाएगा, जबकि SRM2 के जरिए सैंपल कंटेनर को मंगल की सही ऑर्बिट में पहुंचाया जाएगा।

SRM2 मोटर की टेस्टिंग 29 मार्च को की गई थी, जबकि SRM1 मोटर का परीक्षण कैलिफोर्निया के एयरफोर्स बेस पर 7 अप्रैल को किया गया था। दोनों से टेस्ट सफल रहे थे।

कब लॉन्च हुआ था पर्सीवरेंस रोवर

इससे पहले पर्सीवरेंस मार्स रोवर 18-19 फरवरी 2021 की रात मंगल पर जीवन की तलाश के लिए उतरा था। इसने भारतीय समय के अनुसार रात करीब 2 बजे मार्स की सबसे खतरनाक सतह जजीरो क्रेटर पर लैंडिंग की थी। इस सतह पर कभी पानी हुआ करता था।

NASA ने दावा किया था कि यह अब तक के इतिहास में रोवर की मार्स पर सबसे सटीक लैंडिंग थी। पर्सीवरेंस रोवर लाल ग्रह से चट्‌टानों के नमूने भी लेकर आएगा।

रोवर ने भेजी थी ऑडियो रिकॉर्डिंग

लॉन्चिंग के कुछ दिन बाद ही पर्सीवरेंस रोवर ने मंगल ग्रह की पहली ऑडियो रिकॉर्डिंग जारी की थी। 10 सेकंड की इस ऑडियो क्लिप में बहुत मामूली आवाज थी। नासा के मुताबिक, यह उसके पर्सीवरेंस रोवर के उतरने के बाद वहां मौजूद धूल और मिट्टी पर पड़े दबाव की वजह से पैदा हुई थी।

करीब 1 महीने बाद मार्च में इस रोवर ने करीब 21.3 फीट तक टेस्ट ड्राइव की थी। इससे मंगल की मिट्‌टी पर उसके पहियों के निशान बन गए थे। NASA ने इन निशानों की तस्वीर सोशल मीडिया पर शेयर की थी।