आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस/ आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल: द्वितीय विश्व युद्ध में हुए युद्ध अपराधों की सुनवाई में शामिल हुए आखिरी वकील बेन फ्रेंक्ज का शुक्रवार को निधन हो गया। बेन ने सिर्फ 27 साल की उम्र में 22 नाजी अफसरों के गुनाहों को साबित किया था।

अमेरिका के हॉलोकोस्ट म्युजियम ने बताया कि उन्होंने 103 साल की उम्र में फ्लोरिडा में आखिरी सांसें ली। जनसंहार के दोषियों को सजा दिलाने में उनकी भूमिका को हमेशा याद रखा जाएगा।

पहले सैनिक फिर जज बनकर नाजियों को सजा दिलवाई

बेन फ्रेंक्ज ने साल 1943 में हार्वर्ड लॉ स्कूल से पढ़ाई की थी। इसके बाद वो अमेरिकी सेना में भर्ती हो गए थे। उन्होंने हाड़ कंपा देने वाली ठंड के बीच बैटल ऑफ बल्ज की लड़ाई भी लड़ी थी। सार्जेंट की रैंक पर पहुंचने के बाद उन्हें उस टीम का सदस्य बनाया गया जिस पर नाजियों के किए युद्ध अपराधों की जांच करने की जिम्मेदारी थी।

बेन ने दावा किया था कि इस टीम के साथ काम करते हुए उन्होंने नाजियों के यातना शिविरों में लाशों के ढेर देखे थे। उन्होंने कहा था, जब हम बुचनवॉल्ड पहुंचे तो हमने वहां सूख कर लकड़ी हो चुके लोगों को छिपे हुए देखा, इन्हें यातनाएं देकर कमजोर किया जा चुका था। इन्हें इतनी यातनाएं दी गई थी कि इनके शरीर पर मांस न के बराबर बचा था।