आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस/आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल : ऑनलाइन गेमिंग की आड़ में चल रहे धर्मांतरण सिंडिकेट के सरगना खान शहनवाज मकसूद उर्फ बद्दो की ट्रांजिट रिमांड 15 जून तक मंजूर हो गई है। गाजियाबाद पुलिस ने कोर्ट को बताया कि हम बद्दो को सड़क मार्ग से महाराष्ट्र में ठाणे से गाजियाबाद लेकर जाएंगे। यहां से लेकर जाने और कोर्ट में पेश करने तक करीब 3 दिन का समय लगेगा।
इस पर कोर्ट ने कहा है कि मुल्जिम को रास्ते में खाना, दवाई की दिक्कत न हो, उसकी सुरक्षा का ख्याल रखा जाए। सोमवार दोपहर बाद गाजियाबाद पुलिस बद्दो को लेकर महाराष्ट्र के ठाणे से रवाना होगी। गाजियाबाद पुलिस ने रविवार शाम ठाणे में समुद्र किनारे लॉज से बद्दो को गिरफ्तार किया था। वह ऑनलाइन गेम जिताने की आड़ में लड़कों को कुरान पढ़वाता था।
खान शाहनवाज मकसूद उर्फ बद्दो अपना असली नाम छिपाकर शाहबाज खान नाम से लॉज में छिपा हुआ था। ठाणे पुलिस ने बद्दो को मोबाइल सिम उपलब्ध कराने वाले दोस्त तौफीक और आर्यन खान को भी हिरासत में लिया है। उनसे ठाणे में ही पूछताछ चल रही है।
लॉज के रजिस्टर में नाम-पता गलत लिखवाया
बद्दो अलीबाग के जिस लॉज में ठहरा था, वहां वो 10 जून की रात करीब 8 बजे पहुंचा। CCTV में उसके साथ एक युवक और युवती दिखाई दिए। ये युवक बद्दो का भाई बताया गया, जबकि युवती लॉज कर्मचारी थी। रिसेप्शन पर एंट्री रजिस्टर में बद्दो ने अपना नाम खान शहनवाज की जगह शहबाज खान लिखवाया। एड्रेस उसने मुम्ब्रा की जगह नई दिल्ली लिखा। मोबाइल नंबर भी गलत लिखवाया था।
मुम्ब्रा से वर्ली और फिर अलीबाग में जाकर छिपा था बद्दो
23 साल का खान शहनवाज मकसूद महाराष्ट्र में ठाणे जिले के मुम्ब्रा इलाके का रहने वाला है। एक जून को जैसे ही गाजियाबाद पुलिस ठाणे पहुंची, वो वर्ली इलाके में जाकर छिप गया। पुलिस जब वर्ली पहुंची तो यहां से वो भागकर अलीबाग जा पहुंचा।
अलीबाग पुलिस की मदद से ठाणे ग्रामीण पुलिस ने रविवार शाम शहनवाज को एक होटल लॉज से दबोचा। आरोपी से एक One Plus मोबाइल भी रिकवर हुआ है। आरोपी के घर पर एक कम्प्यूटर मिला है, पुलिस ने जांच के लिए उसे भी कब्जे में लिया है। कहा जा रहा है कि बद्दो के सोशल मीडिया पर तमाम फर्जी नाम से अकाउंट्स हैं।
IICE-BOX टारगेट पूरा करने को पढ़वाई थी कुरान
शुरुआती पूछताछ में बद्दो ने पुलिस को बताया, गाजियाबाद के पीड़ित नाबालिग लड़के से मेरी जान-पहचान साल-2021 के शुरुआत में Fort Nite गेमिंग एप्लिकेशन के जरिये हुई थी। इस गेमिंग एप पर Discod नामक सर्विस के जरिये खिलाड़ियों के बीच बातचीत करने की सुविधा थी। इसी सर्विस से बद्दो ने पीड़ित नाबालिग का मोबाइल नंबर लिया और फोन के जरिये बातचीत शुरू कर दी।