आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस/आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल : आपको जितनी ज्यादा भाषाओं का ज्ञान होगा याददाश्त उतनी ही तेज और मजबूत होगी। लिहाजा, भूलने की बीमारी आपसे उतना ही दूर रहेगी। साइंट्सिट्स का कहना है कि जब हम एक भाषा बोलते-बोलते बीच में दूसरी भाषा बोलने लगते हैं तो ब्रेन का मेमोरी हब कहलाने वाला हिप्पोकैंपस एक खास तरह के नियंत्रण का प्रदर्शन करता है।
साइंटिस्ट्स की बात को ऐसे समझिए- अगर कोई व्यक्ति हिंदी बोल रहा है और वो जानता है कि सुनने वाले व्यक्ति को अंग्रेजी भी आती है, तो बीच-बीच में कुछ वाक्य वो अंग्रेजी में भी बोलने लगेगा। इसके अलावा घर और ऑफिस में हम अक्सर अलग भाषा बोलते हैं। ऐसे में दिनभर ब्रेन के हिप्पोकैंपस की कसरत होती रहती है। इस कसरत से याददाश्त को ज्यादा वक्त तक मजबूत बने रहने में मदद मिलती है।
साइंटिस्ट्स के मुताबिक, भाषाएं ब्रेन को सक्रिय करती हैं। ब्रेन को विकसित करती हैं। जब भी हम कोई भाषा बोलते हैं तो ब्रेन का काफी हिस्सा इसमें सक्रिय होता है। इससे याददाश्त को मजबूत होती है।
आपके मन में सवाल उठ रहे होंगे कि जब हम कई भाषाएं सीखते या बोलते हैं तो हमारा दिमाग कैसे काम करता है। इससे याददाश्त कैसे मजबूत होती है। भाषा का दिमाग और याददाश्त से कैसा कनेक्शन है। आइए इन सवालों के जवाब जानते हैं…
सबसे जरूरी भाषा को समझना है, इसमें ब्रेन का लैंगवेज सेंटर मददगार
दिमाग में दो लैंग्वेज सेंटर होते हैं। ये दोनों ब्रेन के लेफ्ट (बाएं) हिस्से में होते हैं। इनका काम अलग-अलग लैंग्वेज को समझना है। इसलिए अगर कभी हमारे ब्रेन में चोट लग जाती है और बाईं ओर का हिस्सा प्रभावित होता है तो हमारी भाषा या बोलने पर असर पड़ता है।
अब जानिए की लैंगवेज सेंटर भाषा को समझता कैसे है…
प्रोसिडिंग्स ऑफ द नेशनल एकैडमी ऑफ साइंस (PNAS) जर्नल में पब्लिश रिसर्च के मुताबिक, जब व्यक्ति कोई शब्द पढ़ता है तो दिमाग में दो प्रक्रिया एक साथ होती हैं। साइंस की भाषा में एक प्रक्रिया ‘बॉटम-अप’ कहलाती है- जिससे दिमाग अक्षरों को पहचानता है और दूसरी प्रक्रिया ‘टॉप-डाउन’ कहलाती है- जिससे दिमाग याददाश्त की मदद से उन शब्दों का मतलब समझता है।
अब चलते हैं मेमोरी की तरफ…भाषा और याददाश्त का कनेक्शन समझिए
ब्रेन का लैंग्वेज सेंटर जब भाषा समझ लेता है तो वो सारी जानकारी ब्रेन के सेरेब्रल कोर्टेक्स तक पहुंचा देता है। इसके बाद ब्रेन का मेमोरी हब कहलाने वाला हिप्पोकैंपस और तर्क करने वाला सेरेब्रल कोर्टेक्स आपस में बातचीत करते हैं। फिर ब्रेन के अलग-अलग हिस्सों के न्यूरॉन्स एक-दूसरे की सूचनाओं को एक्सचेंज करते हैं। मेमोरी हब प्लानिंग और तर्क करने वाले हिस्से से इन्फॉर्मेशन लेकर उसे याददाश्त में बदलता है।