आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस/आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल: लंदन आमतौर पर भारतीय लोगों की आदत होती है कि कम दूरी या कम दिनों के सफर में भी वे अपने साथ ढेर सारा लगेज लेकर चलते हैं। खासतौर पर ट्रेनों में इस तरह के नजारे आम होते हैं।

एयरलाइंस में ज्यादा वजन पर चार्ज लगने की वजह से लोग सीमित वजन ले जाते हैं लेकिन वहां पर भी लगभग अधिकतम सीमा तो छू ही लेते हैं। लेकिन दुनियाभर में अब सस्टेनेबल ट्रैवलिंग का चलन बढ़ रहा है और यात्रियों को कम से कम लगेज के साथ सफर करने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है।

दुनिया के कुछ फेमस पर्यटन स्थल कुछ प्रकार के लगेज पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगाने पर विचार कर रहे हैं। हो सकता है कि कुछ समय बाद भारी-भरकम सूटकेस और लगेज लेकर यात्रा करना अतीत की बात हो जाए। आखिरकार, कम पैकिंग करके, हम कम कार्बन उत्सर्जन तो कम करते ही हैं, अपने ट्रैवल फुटप्रिंट को भी कम करते हैं, साथ ही ज्यादा सुविधाजनक और व्यवस्थित तरीके से घूमने में सक्षम बनाते हैं।

कुदरती तबाही ने सस्टेनेबल टूरिज्म की जरूरत पर बल दिया

भारत के कई टूरिस्ट स्पॉट्स पर सैलानियों की भीड़-भाड़ ने पर्यावरण को काफी नुकसान पहुंचाया है। हाल ही में हिमाचल और उत्तराखंड में कुदरती तबाही ने सस्टेनेबल टूरिज्म की जरूरत पर बल दिया है। दुनिया में और भी स्थान हैं जहां जाने से पहले आपको अपने लगेज पर दोबारा ध्यान देने की जरूरत हो सकती है।

दुनियाभर में अलग-अलग तरीके से हो रहे हैं प्रयास

दुनिया के कई देशों में अलग-अलग तरीकों से सस्टेनेबल टूरिज्म को बढ़ावा दिया जा रहा है। रोम का वेनिस व्हील वाले सूटकेस पर प्रतिबंध लगाने वाला दुनिया का पहला शहर है। क्रोएशिया के डुब्रोवोनिक शहर ने भी यह लागू कर दिया है।

ईस्ट अफ्रीका के केन्या, तंजानिया और यूगांडा में भी टूर ऑपरेटर्स सैलानियों को सफारी के लिए कम से कम लगेज लाने को प्रोत्साहित कर रहे हैं। स्विटजरलैंड, में आल्प्स की पहाड़ियों के साथ ही फ्रांस और ऑस्ट्रिया में रिसोर्ट लोगों को विंटर स्पोर्ट्स के उपकरण किराये पर उपलब्ध कराते हैं।