आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस/आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल : एशियाई लोगों के खिलाफ हेट क्राइम के विरोध में लंदन के चाइना टाउन में कई एक्टिविस्ट ग्रुपों की रैली में प्रदर्शनकारियों के बीच झ़ड़प हो गई थी। विरोध जताने वाले अधिकतर लोग चीनी थे। नवंबर 2021 में झगड़ा उस वक्त हुआ जब प्रदर्शन के आयोजक नो कोल्ड वॉर ग्रुप के लोगों ने हॉन्गकॉन्ग में लोकतंत्र आंदोलन का समर्थन करने वाले एक्टिविस्ट्स पर हमला कर दिया।
सतह पर दिखता है कि नो कोल्ड वॉर ग्रुप अमेरिकी और ब्रिटिश एक्टिविस्ट्स का बिखरा हुआ ग्रुप है, लेकिन ऐसा नहीं है। यह चीन का बचाव करने और उसका प्रोपेगैंडा आगे बढ़ाने वाला एक अभियान है। इसके पास भरपूर फंड है। इसमें वामपंथ समर्थक अमेरिकी अरबपति नेविले रॉय सिंघम की मुख्य भूमिका है।
चीन के प्रोपेगैंडा के लिए दुनिया भर में धन देते हैं अरबपति सिंघम
गैर लाभकारी संगठनों और शैल कंपनियों के जाल में एक बात छिप गई है कि सिंघम चीन सरकार की मीडिया मशीन के साथ काम करते हैं। वे दुनियाभर में चल रहे प्रोपेगैंडा के लिए धन देते हैं। न्यूयॉर्क टाइम्स की इन्वेस्टिगेशन में सामने आया कि सिंघम के साथ मैसाचुसेट्स में एक थिंक टैंक, मैनहटन की संस्था, दक्षिण अफ्रीका में एक राजनीतिक दल, भारत और ब्राजील में न्यूज ऑर्गनाइजेशन सहित कई ग्रुप जुड़े हैं। इनके पास अरबों डॉलर के साधन हैं।
सिंघम शिकागो में स़ॉफ्टवेयर कंसल्टेंसी कंपनी थॉटवर्क्स चलाते हैं। इससे एक भारतीय न्यूज वेबसाइट भी नेटवर्क से जुड़ी है। चार नए गैर लाभकारी संगठनों के बूते सिंघम का अभियान चलता है। इनके एड्रेस इलिनॉय, विस्कांसिन और न्यूयॉर्क में यूपीएस स्टोर मेलबॉक्स के रुप में दर्ज हैं। यूपीएस स्टोर ग्रुपों से करोड़ों डॉलर दुनियाभर में भेजे गए हैं।
दक्षिण अफ्रीका के एक राजनीतिक दल, अमेरिका में यूट्यूब चैनलों और घाना, जांबिया में गैर लाभकारी संगठनों को पैसा मिलता है। ब्राजील में ब्राजील डि फेक्टो अखबार चलाने वाले ग्रुप को भी धन मिला है। यह अखबार चीन के राष्ट्रपति शी जिन पिंग की प्रशंसा में लेख छापता है।
भारत में न्यूजक्लिक को फंड मिलता है
नई दिल्ली में कॉरपोरेट फाइलिंग से पता लगा है कि सिंघम के नेटवर्क ने न्यूज साइट- न्यूजक्लिक को फाइनेंस किया है। ये ग्रुप तालमेल से काम करते हैं। उन्होंने एक-दूसरे के कंटेंट सोशल मीडिया पर सैकड़ों बार पोस्ट किए हैं। चाइना टाउन, लंदन में 2021 में प्रदर्शन करने वाले ग्रुप अमेरिकी अरबपति से जुड़े हैं। नो कोल्ड वॉर जैसे ग्रुप अभी हाल के वर्षों में उभरे हैं। अमेरिकन एंटी वॉर ग्रुप कोड पिंक में समय बीतने के साथ बदलाव आया है।
कोड पिंक ने पहले मानवाधिकारों को लेकर चीन की आलोचना की थी, लेकिन अब वह मुस्लिम उइगुरों पर अत्याचारों का बचाव करता है। अमेरिका के गैर लाभकारी संगठनों से ग्रुपों को धन मिलता है। इन्हें 2200 करोड़ रुपए से अधिक डोनेशन मिल चुका है। 69 साल के सिंघम शंघाई में बैठते हैं। वहां उनका नेटवर्क यूट्यबू पर एक शो चलाता है। इसके लिए शंघाई का प्रोपेगैंडा विभाग कुछ पैसा देता है। दो अन्य ग्रुप दुनिया में चीन के पक्ष का प्रचार करने के लिए एक चीनी यूनिवर्सिटी के साथ काम कर रहे हैं।