आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस/आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल : जापान के शहर हिरोशिमा में 19 मई से G7 देशों की बैठक होगी। अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक इसमें चीन के बढ़ते आर्थिक दबदबे पर चर्चा की जाएगी। इसे लेकर सभी देश एक बयान भी जारी करेंगे।
जॉइंट स्टेटमेंट में एक पूरा सेक्शन चीन की चुनौती से निपटने के तरीकों पर भी होगा। वहीं, इस बार जारी होने वाले स्टेटमेंट पिछली बार के मुकाबले ज्यादा सख्त होंगे। G7 देशों के प्रमुख के अलावा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी इस बैठक में हिस्सा लेंगे।
बाइडेन की फॉरेन पॉलिसी में चीन पर फोकस
रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडेन की फॉरेन पॉलिसी का फोकस चीन को काउंटर करने पर है। हालांकि, डोनाल्ड ट्रम्प ने भी G7 के जरिए चीन के आर्थिक दबदबे पर सवाल उठाए थे, लेकिन उस पर ज्यादा ध्यान नहीं दिया गया था।
पिछले महीने G7 देशों के विदेश मंत्रियों की बैठक में भी चीन का मुद्दा उठाया गया था।
हिरोशिमा में शुरू हो रही बैठक चीन के खिलाफ G7 देशों की एकजुटता को भी परखेगी। दरअसल, पिछले महीने फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने चीन के दौरे से लौटने के बाद अमेरिका के खिलाफ जाकर वन चाइन पॉलिसी का समर्थन किया था। मैक्रों ने कहा था कि हमें चीन से संबंधों पर अमेरिका के दबाव से बचना होगा। ऐसे में फ्रांस G7 देशों के जॉइंट स्टेटमेंट में चीन के खिलाफ बयानबाजी को लेकर बचने की कोशिश कर सकता है।
चीन के खिलाफ खुलकर सामने आने से हिचक रहे देश
एटलांटिक काउंसिल जियो इकोनॉमिक सेंटर के सीनियर डायरेक्टर जॉश लिप्सकी ने कहा कि अमेरिका एग्रीमेंट के तौर पर सभी देशों से चीन के खिलाफ सख्त कदम उठाना चाहता है। जबकि बाकी देश इस मामले को लेकर अमेरिका जितनी दिलचस्पी नहीं दिखा रहे हैं। वो चीन के खिलाफ खुलकर सामने आने से हिचकते हैं।
वहीं, अमेरिकी अधिकारी ने कहा कि जाहिर तौर पर चीन को लेकर G7 के सभी देशों की अपनी पॉलिसी है। इसके बावजूद कुछ मामलों में सभी देश सहमति रखते हैं।