आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस/आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल : दिल्ली हाईकोर्ट में आज यानी शुक्रवार को संकटग्रस्त एयरलाइन गोफर्स्ट से जुड़ी मामले में सुनवाई होनी है। गुरुवार को जज प्रतिभा एम सिंह ने इस सुनवाई से खुद को अलग कर लिया था। उन्होंने सुनवाई से खुद को अलग करने का कोई कारण नहीं बताया था। ग्रोफर्स्ट को लीज पर एयरक्राफ्ट देने वाली कंपनियों यानी लेसर्स ने अपने विमान वापस लेने के लिए हाईकोर्ट में याचिका लगाई है।

जिन लेसर्स ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है, उनमें एसिपिटल इन्वेस्टमेंट्स एयरक्राफ्ट 2 लिमिटेड, EOS एविएशन 12 (आयरलैंड) लिमिटेड, पेमब्रोक एयरक्राफ्ट लीजिंग 11 लिमिटेड और SMBC एविएशन कैपिटल लिमिटेड शामिल हैं। लेसर्स ने हाईकोर्ट से डायरेक्टोरेट जनरल ऑफ सिविल एविएशन यानी DGCA को उनके एयरक्राफ्ट को डिसजिस्टर करने का आदेश देने का आग्रह किया है जो वर्तमान में गोफर्स्ट को लीज पर दिया गया है।

10 मई को नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल यानी NCLT ने गो फर्स्ट एयरलाइन को राहत देते हुए मोरेटोरियम की मांग को मान लिया था। मोरेटोरियम यानी लेनदार किसी भी लोन के मामले में कोई लीगल एक्शन नहीं ले सकते। लेसर्स भी अपने एयरक्राफ्ट वापस नहीं ले सकते। NCLT के इस आदेश के खिलाफ लेसर्स ने NCLAT यानी नेशनल कंपनी लॉ अपीलेट ट्रिब्यूनल में भी अपील की थी। लेकिन अपीलेट ट्रिब्यूनल ने NCLAT के आदेश को बरकरार रखा।

गो फर्स्ट से DGCA ने रिवाइवल प्लान मांगा

उधर, DGCA ने गो फर्स्ट को अपना रिवाइवल का प्लान 30 दिन के अंदर जमा करने को कहा है। PTI की रिपोर्ट के मुताबिक, DGCA ने एयरलाइन से ऑपरेशनल एयरक्राफ्ट, पायलट और दूसरे अधिकारियों की उपलब्धता, मेनटेनेंस एग्रीमेंट और फंडिंग के स्टेटस और कई दूसरी डिटेल्स भी मांगी है। रिपोर्ट के मुताबिक, गो फर्स्ट के रिवाइवल प्लान की DGCA समीक्षा करेगा और आगे उसी के अनुसार एक्शन लेगा।

सिलसिलेवार तरीके से समझें अब तक क्या-क्या हुआ?

  1. फ्लाइट को अचानक सस्पेंड किया

गो फर्स्ट एयरलाइन ने 2 मई 23 को अचानक ऐलान किया कि वो अपनी फ्लाइट्स 3, 4 और 5 मई के लिए कैंसिल कर रही है। इसके बाद फ्लाइट सस्पेंशन बढ़ाकर 9 मई कर दिया गया। फिर इसे 12 मई, 19 मई, 23 मई, 26 मई और 28 मई कर दिया गया। एयरलाइन के पास फ्यूल भराने का भी पैसा नहीं है। गो फर्स्ट की वेबसाइट के अनुसार एयरलाइन एक समय रोजाना 27 डोमेस्टिक और 8 इंटरनेशनल डेस्टिनेशन के लिए 200 से ज्यादा फ्लाइट ऑपरेट करती थी।

  1. दिवाला याचिका लेकर एयरलाइन NCLT पहुंची

फ्लाइट्स कैंसिल करने के तुरंत बाद गो फर्स्ट स्वैच्छिक दिवाला याचिका लेकर नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल यानी NCLT पहुंची। NCLT ने 4 मई को इस मामले की सुनवाई की। एयरलाइन ने इंटरिम मोरेटोरियम की मांग की। गो फर्स्ट को लीज पर एयरक्राफ्ट देने वाली फर्म्स ने NCLT से कहा कि उन्हें एयरलाइन की इंटरिम मोरेटोरियम की मांग पर आपत्ति है। मोरेटोरियम के गंभीर परिणाम होंगे। वे अपने विमान को वापस नहीं ले पाएंगे। NCLT ने फैसला सुरक्षित रख लिया।

  1. NCLT ने मानी एयरलाइन की मोरेटोरियम की मांग

10 मई को NCLT ने एयरलाइन को राहत देते हुए मोरेटोरियम की मांग को मान लिया। जस्टिस रामलिंगम सुधाकर और एलएन गुप्ता की दो सदस्यीय बेंच ने कर्ज में डूबी कंपनी को चलाने के लिए अभिलाष लाल को इंटरिम रिजॉल्यूशन प्रोफेशनल यानी IRP नियुक्त किया। वो एयरलाइन को रिवाइव करने के लिए मैनेजमेंट संभालेंगे। गो फर्स्ट के सस्पेंडेड बोर्ड को नियमित खर्च के लिए 5 करोड़ रुपए भी जमा कराने होंगे।

  1. अपीलेट ट्रिब्यूनल ने NCLT के आदेश को बरकरार रखा

NCLT के इस आदेश के खिलाफ लेसर्स ने NCLAT यानी नेशनल कंपनी लॉ अपीलेट ट्रिब्यूनल में भी अपील की थी। लेकिन अपीलेट ट्रिब्यूनल ने NCLAT के आदेश को बरकरार रखा।