आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस/आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल : ब्रिटेन की महारानी क्वीन एलिजाबेथ के निधन के 8 महीने बाद वहां की सरकार ने उनके अंतिम संस्कार पर आए खर्चे की जानकारी सार्वजनिक की है। सरकार ने गुरुवार को बताया कि 8 सितंबर को उनके निधन के बाद 10 दिनों तक कार्यक्रम चले थे।

इसमें 200 मिलियन डॉलर यानी एक हजार करोड़ रुपए खर्च हुए थे। ये 1965 में पूर्व प्रधानमंत्री विंस्टन चर्चिल की मौत के बाद ब्रिटेन में हुआ पहला स्टेट फ्यूनरल था। यानी ऐसा अंतिम संस्कार था जो सरकार की तरफ से किया गया था।

महारानी के अंतिम संस्कार में जुटी थी 2 लाख से ज्यादा लोगों की भीड़

महारानी के अंतिम संस्कार में 2 लाख से ज्यादा लोगों की भीड़ उमड़ी थी। लोग 24 घंटे वेस्टमिंस्टर ऐबे चर्च के बाहर लाइन लगाकर खड़े थे। ऐसे में कार्यक्रम में कोई गड़बड़ी नहीं होने देना चाहते थे। इसके लिए सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए थे। सरकार ने अलग-अलग विभागों के खर्च बताए हैं।

गृह मंत्रालय को 756 करोड़, कल्चरल मिनिस्ट्री को 589 करोड़, ट्रांसपोर्ट मिनिस्ट्री को 26 करोड़, फॉरेन ऑफिस को 21 करोड़ और रक्षा मंत्रालय को 29 करोड़ रुपए का खर्च उठाना पड़ा था।

बेटे किंग चार्ल्स की ताजपोशी में भी एक हजार करोड़ तक का खर्च

एक तरफ जहां क्वीन एलिजाबेथ II के अंतिम संस्कार में ब्रिटेन को हजार करोड़ का खर्च उठाना पड़ा था। वहीं, उनके निधन के 8 मई बाद हुए उनके सबसे बड़े बेटे किंग चार्ल्स की ताजपोशी में भी सरकार ने 513 करोड़ से एक हजार करोड़ रुपए तक का खर्च उठाया था। इसका कई राजशाही विरोधी संगठनों ने विरोध किया था। 6 मई को हुई ताजपोशी में एकतरफ जहां राजशाही के समर्थक जुटे थे दूसरी तरफ ताजपोशी के विरोध में लोगों ने मार्च निकाला था।

एक नजर एलिजाबेथ की जिंदगी पर

पिता की मौत के बाद एलिजाबेथ II ने संभाली थी सत्ता

ब्रिटेन की महारानी एलिजाबेथ II का 8 सितंबर को निधन हो गया था। उन्होंने 6 फरवरी 1952 को पिता किंग जॉर्ज की मौत के बाद ब्रिटेन का शासन संभाला। तब उनकी उम्र सिर्फ 25 साल थी। तब से 70 साल तक उन्होंने शासन किया।

क्वीन ने निधन से 2 दिन पहले ही ‌‌ब्रिटेन की 15वीं PM लिज ट्रस को शपथ दिलाई थी। एलिजाबेथ II ब्रिटेन के इतिहास में सबसे लंबे समय तक शासन करने वाली पहली महिला सम्राट हैं।