आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस/आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल : वेतनभोगी (सैलरीड) बार-बार बैंक खाते से पैसे निकालते और जमा करते हैं। सिर्फ इसी आधार पर इनके खाते हाई रिस्क श्रेणी में डाल दिए जाते हैं। छात्रों के खातों को भी इसी कारण जोखिम की श्रेणी में डाल दिया जाता है। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की कमेटी ने इसे गलत माना है। साथ ही सिफारिश की है कि ऐसे ग्राहकों के खाते लो रिस्क श्रेणी में रखे जाएं। बैंक हाई रिस्क खातों की केवाईसी नियमित अंतराल पर करता है।

ग्राहक समय पर नाम-पते का प्रूफ लेकर बैंक नहीं पहुंचें तो खाते में लेन-देन रोक दिया जाता है। इससे उन्हें परेशानी होती है। कमेटी ने कहा है कि बार-बार केवाईसी न मांगी जाए। ग्राहक न दें तो उनके खातों पर रोक न लगे।

RBI के डिप्टी गवर्नर बीपी कानूनगो की अध्यक्षता में कस्टमर सर्विस स्टैंडर्ड की समीक्षा के लिए कमेटी गठित की गई थी। कमेटी ने कहा है कि वेतनभोगियों के खातों को हाई रिस्क पर रखना सही नहीं है, चाहे वे हाई नेटवर्थ इंडिविजुअल (HNI) ही क्यों न हों। इसके अलावा भी कमेटी ने सरकार से कई सिफारिशें की हैं…

1 . आंतरिक लोकपाल की सैलरी के लिए अलग फंड: सभी बैंकों के पास अपने लोकपाल होते हैं। ग्राहकों की शिकायतों का निपटारा सबसे पहले आंतरिक लोकपाल ही करते हैं। ग्राहकों की शिकायत रहती है कि ये अधिकतर बैंक के पक्ष में फैसले देते हैं।

सुझाव: इनकी (आंतरिक लोकपाल) सैलरी के लिए RBI ग्राहक जागरूकता मद में फंड बनाए। क्योंकि बैंक से सैलरी लेने के कारण वे खुद को बैंक कर्मचारी ही मानते हैं।

  1. नामिनी को 30 दिन में क्लेम दें: बैंकों के खिलाफ सबसे ज्यादा शिकायतें खातों के संचालन से जुड़ी हैं। खाताधारक के निधन के बाद परिजनों को क्लेम लेने में परेशानी होती है।

सुझाव: सभी जरूरी दस्तावेज जमा होने के 30 दिन के भीतर क्लेम सेटल करना सुनिश्चित करें।

  1. मिस सेलिंग पर रोक लगे: कमीशन व बाध्यताओं के चलते बैंक कर्मचारी बीमा और म्यूचुअल फंड समेत दूसरे निवेश उत्पाद ग्राहकों को देते हैं।

सुझाव: बैंक पड़ताल करें कि ये उत्पाद किस तरह बेचे जा रहे हैं। वे इंटरनल ऑडिट से पता लगाएं कि ये उत्पाद ग्राहकों पर दबाव बनाकर तो नहीं बेचे जा रहे। रोक लगाने के उपाय किए जाएं।

ये सिफारिशें भी कीं

बैंक में खराब इंफ्रास्ट्रक्चर के कारण ग्राहक को चोट लगे तो बैंक जिम्मेदार होगा। इलाज और हर्जाने के लिए बैंक पर्याप्त बीमा करवाएं।

एटीएम में टैक्स टू स्पीच सॉफ्टवेयर और चैटबॉट लगाएं। ट्रांजेक्शन फेल हो तो वजह बताने के लिए स्क्रीन पर प्रॉपर मैसेज डिस्प्ले हो।