आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस/आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल :  ओडिशा के बालासोर में ट्रेन हादसे वाले ट्रैक की मरम्मत का काम पूरा हो गया है। हादसे के 51 घंटे बाद रविवार रात को इस ट्रैक से जब पहली ट्रेन रवाना की गई, तब रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव हाथ जोड़कर खड़े दिखे। उन्होंने कहा कि हमारी जिम्मेदारी अभी खत्म नहीं हुई। हमारा लक्ष्य लापता लोगों को खोजना है। यह कहकर वे भावुक हो गए।

रेल मंत्री हादसे के बाद से ही बालासोर के बहानगा बाजार स्टेशन पर राहत-बचाव और ट्रैक रिपेयरिंग की निगरानी कर रहे हैं। प्रधानमंत्री मोदी भी शनिवार को बालासोर का दौरा करने के बाद रेल मंत्री से लगातार रेस्क्यू ऑपरेशन से जुड़े अपडेट्स ले रहे थे।

हादसे के 48 घंटे बाद झाड़ियों में बेहोश मिला युवक

हादसे के 48 घंटे बाद रविवार रात घटनास्थल से एक यात्री जिंदा मिला। हादसे के वक्त वह बोगी से निकलकर झाड़ियों में गिरकर बेहोश हो गया था। युवक की पहचान असम के रहने वाले डिलाल के रूप में हुई है।उसे तुरंत रेस्क्यू करके इलाज के लिए भेजा दिया गया, जहां उसे होश भी आ गया। घटना में उसका फोन और वॉलेट गायब हो गया।

हादसे से जुड़े 3 बड़े बयान

रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने रविवार शाम को कहा, अब तक जो जानकारी मिली है उसके बाद रेलवे बोर्ड की तरफ से इस मामले की CBI जांच की सिफारिश की गई है।

रेल मंत्री वैष्णव ने रविवार शाम को बालासोर में कहा, ‘इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग में बदलाव की वजह से एक्सीडेंट हुआ। जिम्मेदारों की पहचान भी कर ली गई है।’

रेलवे बोर्ड की ऑपरेशन एंड बिजनेस डेवलपमेंट मेंबर जया वर्मा ने दिल्ली में कहा कि शुरुआती तौर पर लगता है कि सिग्नल में गड़बड़ी थी।

हादसे में मारे गए लोगों की संख्या पर बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कहा था कि हमारे पास हादसे में जान गंवाने वालों की लिस्ट बढ़ रही, लेकिन उनके पास घट रही है। हादसे में पश्चिम बंगाल के 162 लोगों की जान गई है। अब तक पूरी लिस्ट नहीं मिल पाई है। बहुत से ऐसे लोग भी यात्रा करते हैं जो लिस्ट में नहीं होते। 182 शवों की अब तक पहचान नहीं हुई है।

ओडिशा सरकार ने कहा- हादसे में 288 नहीं, 275 जानें गईं

ओडिशा के चीफ सेक्रेटरी प्रदीप जेना ने रविवार सुबह दावा किया कि हादसे में 288 नहीं, बल्कि 275 लोगों की जान गई है। उन्होंने कहा कि कुछ शव दो बार गिन लिए गए थे, इस वजह से मृतकों की संख्या में गड़बड़ी हुई। हादसे में 1,175 लोग घायल हुए, जिनमें से 793 को इलाज के बाद डिस्चार्ज किया जा चुका है।