आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस/आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल : ईरान की कैद से अपने 5 नागरिकों को छुड़वाने के बदले अमेरिका ने एक डील की है। इसके तहत अमेरिका अपने नागरिकों के बदले साउथ कोरिया में सीज किए गए ईरान के 49 हजार करोड़ रुपए रिलीज करेगा। न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक इस डील के तहत ईरान ने गुरुवार को अपनी कुख्यात एविन जेल से अमेरिकियों को निकाल दिया है और उन्हें एक होटल में शिफ्ट किया गया है।
ईरान में अमेरिकी-ईरान मूल के लोगों की हिरासत का मुद्दा काफी सालों से दोनों देशों के बीच विवाद की वजह बना हुआ था। ईरान में कैद किए गए अमेरिकियों के परिवार के लोग काफी समय से बाइडेन सरकार पर उन्हें छुड़वाने के लिए दबाव बना रहे थे। अलजजीरा की रिपोर्ट के मुताबिक जल्द ही ईरान उन्हें अमेरिका को सौंप सकता है। फिलहाल उन्हें 24 घंटे की कैद में रखा गया है।
कतर के जरिए ईरान को दिए जाएंगे 49 हजार करोड़
न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक 49 हजार करोड़ रुपए सीधे ईरान को नहीं दिए जाएंगे। उन्हें कतर के सेंट्रल बैंक में ट्रांसफर किया जाएगा। इसमें काफी हफ्तों का समय लग सकता है। अमेरिकी पाबंदियों से जूझ रही ईरान की अर्थव्यवस्था के लिए 49 हजार करोड़ रुपए के फंड का रिलीज होना बड़ी राहत होगी।
ईरान के 41 लाख करोड़ रुपए का फंड अमेरिकी पाबंदियों के चलते दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में रुका हुआ है। वहीं, अमेरिका ने इस डील पर अमेरिका के विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन ने कहा है कि ये ईरान में कैद लोगों के परिवार वालों के लिए कोई बुरा सपना खत्म होने जैसा है।
उन्होंने ये भी कहा है कि अमेरिकी लोगों को पूरी तरह से रिहा किया जाना चाहिए। ईरान ने इन्हें गैर-कानूनी तरीके से हिरासत में लिया था। इस डील के तहत अमेरिका भी उनकी जेल में बंद कुछ ईरानी कैदियों को छोड़ सकता है।
क्या है वो न्यूक्लियर डील जिसके रद्द होने से ईरान पर लगी अमेरिकी पाबंदियां
2015 में ईरान ने चीन, फ्रांस, रूस, ब्रिटेन, जर्मनी और अमेरिका के साथ एक परमाणु समझौता किया। ये समझौता इसलिए हुआ क्योंकि पश्चिम देशों को डर था कि ईरान परमाणु हथियार बना सकता है या फिर वो ऐसा देश बन सकता है जिसके पास परमाणु हथियार भले ही ना हों लेकिन उन्हें बनाने की सारी क्षमताएं हों और कभी भी उनका इस्तेमाल कर सके।
ईरान के साथ परमाणु समझौता कर न्यूक्लियर कैपिसिटी बढ़ाने के उसके शोध कार्यक्रम को काफी नियंत्रित किया गया। ईरान को परमाणु ऊर्जा के शांतिपूर्ण इस्तेमाल पर जोर देने वाली अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (आईएईए) के जरिए अंतरराष्ट्रीय निगरानी में लाया गया। इसके बदले परमाणु कार्यक्रम के चलते ईरान के पर लगे आर्थिक प्रतिबंध हटाए गए।