आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस/आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल : अंटार्कटिका के वैज्ञानिकों के बीच होने वाले कम्युनिकेशन से एक नई भाषा शैली का पता चला है। यानी वहां रहने वाले रिसर्चर्स और साइंटिस्ट्स अंग्रेजी, हिंदी, फ्रेंच और दुनिया की करीब 7,100 भाषाओं से इतर एक नए एक्सेंट में बातचीत करते हैं। इसे ‘अंटार्कटिका एक्सेंट’ कहा जा रहा है।

अंटार्कटिका में करीब 4 हजार लोग रहते हैं। यहां का तापमान माइनस 98 डिग्री सेल्सियस तक पहुंचा जाता है, जिस वजह से कुछ समय के लिए यहां सिर्फ एक हजार लोग ही रहते हैं। ये सभी अंटार्कटिका के नागरिक नहीं होते बल्कि अलग-अलग देशों के रिसर्चर्स और साइंटिस्ट्स होते हैं।

नए एक्सेंट का पता लगाने के लिए इन 1000 रिसर्चर्स में से 11 की आवाज रिकॉर्ड की गई। इनमें से 8 ब्रिटिश, 1 अमेरिकन, 1 जर्मन और 1 आईरिश रिसर्चर थे। इनकी भाषा अलग थी, लेकिन उनके उच्चारण एक-दूसरे से घुलमिल गए थे। उनके कई शब्द और बोलने का तरीका एक जैसा था। इसे ही ‘अंटार्कटिका एक्सेंट’ नाम दिया गया है।

वॉवल्स का उच्चारण लंबा हुआ

IFLScience के मुताबिक, आवाज की स्टडी में पाया गया कि रिसर्चर्स वॉवल्स (स्वरों) का उच्चारण लंबा कर रहे थे। उदाहरण के लिए- फ्लो और डिस्को जैसे शब्दों में आने वाले ‘ओ’ का उच्चारण वो गले की जगह मुंह से कर रहे थे। रिसर्चर जॉनथन हैरिंगटन ने कहा- उच्चारण में बदलाव पहचानना मुश्किल था, लेकिन इन्हें मापा जा सकता था।

मंगल पर एस्ट्रोनॉट्स नया एक्सेंट बना लेगें : रिसर्चर हैरिंगटन

रिसर्चर जॉनथन हैरिंगटन ने कहा कि इस स्टडी से ये पता चलता है कि जब अलग-अलग देशों के लोग दुनिया से दूर किसी जगह पर एक-साथ रहते हैं तो नए एक्सेंट डेवलप होने के चांस बढ़ जाते हैं। ये बिलकुल वैसी स्थिति है जिसने इंग्लिश भाषा को अमेरिकन इंग्लिश, ब्रिटिश इंग्लिश या ऑस्ट्रेलियन इंग्लिश में बदल दिया। उन्होंने कहा- अगर कभी एस्ट्रोनॉट्स को मंगल ग्रह (मार्स) पर मिशन के लिए भेजा गया तो हम ऐसे ही किसी नए एक्सेंट की उम्मीद कर सकते हैं।

रिसर्चर हैरिंगटन के मुताबिक, आईसोलेशन में रहने वाले कम लोग नए एक्सेंट डेवलप कर लेते हैं। आइए जानते हैं कि अंटार्कटिका में रहने वाले रिसर्चर्स-साइंटिस्ट्स दुनिया से कितने आईसोलेटिड हैं…

ज्यादातर वक्त अंधेरा रहता है- साइंटिस्ट

यहां दुनियाभर के साइंटिस्ट आते हैं, इसलिए इसका नाम ‘द इंटरनेशनल कॉन्टिनेंट’ भी रखा गया है। एक ब्रिटिश रिसर्च सेंटर में ढाई साल बिताने वाले मौसम विज्ञानिक एलेक्स गैफिकिन ने न्यूज एजेंसी ‘रॉयटर्स’ को बताया कि अंटार्कटिका में सर्दियों के समय लगातार अंधेरा रहता है। यहां रहना काफी मुश्किल और मैजिकल है।

उन्होंने कहा- मैजिकल इसलिए है क्योंकि हमें ऐसी चीजें देखने मिलती हैं, जो दुनिया में कहीं नहीं है, जैसे- विशाल समुद्री जीव, पेंग्विन कॉलोनी और अद्भुत ग्लेशियर। हमें एक साल या 15 महीने में एक बार शिप लेने-छोड़ने के लिए आती-जाती है।