रायगढ़ जून 2022. योग के प्रति लोगों में जागरूकता लाने के लिए हर साल 21 जून को योग दिवस के रूप में मनाया जाता है। हम पिछले 7 वर्षो से अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस मनाते आ रह हैं तो अब इसे पूरे विश्व में एक उत्सव के रूप में मनाया जाता है। सभी लोग जो आधुनिक परिवेश में जी रहे हैं उनमें अपने भविष्य को लेकर चिंता और बहुत सारे अदृश्य तनाव हैं जिनके कारण वह कहीं ना कहीं उनके जीवन में खुशियों को कम करने का प्रयास करती है। यदि हम अपने सांस्कृतिक धरोहर योग को समाज पूर्णतया स्थापित कर दें और दैनिक जीवन शैली के रूप में शामिल कर लें तो व्यर्थ के मानसिक विचार और नकारात्मक भाव समाप्त हो सकते हैं।
इस सम्बन्ध में आयुर्वेद अधिकारी डॉ. नीरज मिश्रा कहते हैं –“ हर भारतीय अपनी संस्कृति में रहना चाहता है वह विश्व के किसी भी कोने में रहे लेकिन अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस पर वह निश्चय ही योग करके अपना भारतीय होने का प्रमाण प्रस्तुत कर ही देता है। जब चीज अच्छी होती है तो उसका अनुकरण हर कोई करता है।अब तो ये विश्व के लगभग देशों में होने लगा है। आज यदि हम अपने समाज में अपने युवाओं के माध्यम से इन्हे स्थापित करें तो बहुत सारी बीमारियों पर तो अंकुश लग ही जायेगे बल्कि समाज में विशिष्ट संस्कार का संचार होगा जो युवाओं के लिए प्रेरणा दायक होगा।“
कोरोना काल ने योग की महत्वता को और भी बढ़ा दिया है। हर कोई इस महामारी को मात देने के लिए निरंतर योग साधना कर रहा है। जिले में योग दिवस के दिन लगभग सभी जगहों पर योग किया जाता है। फिर चाहे वह उद्योग, एनजीओ, स्कूल या फिर कोई अन्य संस्थान हो। जिंदल स्टील एंड पावर के जनसंपर्क विभाग से मिली जानकारी के अनुसार उनके यहां ऑफिसर्स क्लब द्वारा विभिन्न वर्गों की योग प्रतियोगिता का आयोजन है। ओपी जिंदल स्कूल के बच्चे और वहां का स्टाफ हर साल योग दिवस पर कुछ न कुछ बेहतर ही करता है। गैर सरकारी संगठन लोकशक्ति अपने आसपास के शासकीय स्कूलों में योग दिवस पर विशेष सत्र आयोजित कर रहा है।
प्लेस्कूल ब्लूमिंग बड्स की डायरेक्टर ज्योति प्रभाकर बताती हैं, “ बच्चे सबसे पहली बार प्लेस्कूल में ही आते हैं। हम बच्चों को शुरुआत से ही योग के बारे में बताते हैं। सामान्य एक्सरसाइज और उसके नाम को बच्चों को बताया जाता है। छोटे बच्चों की बॉडी मैमोरी बहुत स्ट्रांग होती है और लंबे समय तक साथ रहती है। बच्चों को योग की आदत डालने की यही सही उम्र होती है। इससे बच्चे का शारीरिक के साथ मानसिक विकास भी होता है। बच्चे कठिन से कठिन आसन आसानी से सीख जाते हैं। हमारे लिए हर दिन योग दिवस है।”
योग दिवस का महत्व
करो योग रहो निरोग, यह सिर्फ स्लोगन मात्र नहीं है बल्कि यह योग की महत्वता को दर्शाता है। योग करने से व्यक्ति शारीरिक और मानसिक रूप से स्वस्थ रहता है। तथा आधुनिक युग में तनाव और चिंता को कम करने के लिए यह रामबाण है। यह आपके रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत बनाता है, जिससे आप स्वस्थ रह सकते हैं। योग दिवस का उद्देश्य लोगों को इसके प्रति सजग करना है।
तो दे पाएंगे योग को उच्च सम्मान : डॉ नीरज मिश्रा
आयुर्वेद अधिकारी डॉ. नीरज मिश्रा की मानें तो “आज युवा जागरुक हैं वह अपने-अपने क्षेत्र में भारतीय संस्कृति को सम्मानजनक तरीके से प्रचारित करें तो हम अपने आने वाली पीढ़ियों के लिए एक प्रेरणा स्रोत बना सकते है। मैं समझता हूं अपने आचरण में संयम बना लें या आचरण शुद्ध कर ले तो इससे कल्याणकारी कुछ नहीं हो सकता है। आयुर्वेद भी मानता है स्वस्थ व्यक्ति के स्वास्थ्य की रक्षा करना उसका उद्देश्य है और दूसरा अस्वस्थ को रोग रहित करना । सर्वप्रथम उद्देश्य यदि अच्छे से पूर्ण हो जाये तो अधिक औषधि की आवश्यकता नहीं होगी और एक स्वस्थ भारतीय समाज की परिकल्पना ही नहीं वास्तव में अपने भारतीय धरोहर योग को उच्च सम्मान दे पायेंगे।“
5 हजार साल पुरानी है योग की परंपरा
योग प्रशिक्षक सुनीता तिवारी कहती हैं “करें योग, रहें निरोग, योग का शाब्दिक अर्थ है जोड़। अर्थात वह अवस्था जो आत्मा से परमात्मा से मेल अथवा जोड़ करवाए। योग हमारे जीवन में बहुत महत्वपूर्ण स्थान रखता है। भारत में योगाभ्यास की परंपरा तकरीबन 5,000 साल पुरानी है। योग को शरीर और आत्मा के बीच सामंजस्य का अद्भुत विज्ञान माना जाता है। अंतरराष्ट्रीय योग दिवस मनाने के लिए 21 जून का दिन तय करने के पीछे एक खास वजह है। 21 जून साल के 365 दिनों में सबसे बड़ा होता है, यह मनुष्य के दीर्घ जीवन को दर्शाता है। तथा इस दिन सूर्य जल्दी उदय होता है और देर से ढ़लता है, मान्यता है कि इस दिन सूर्य का तप सबसे ज्यादा प्रभावी होता है और प्रकृति की सकारात्मक ऊर्जा सक्रिय रहती है।“