सीएनएन सेंट्रल न्यूज़ एंड नेटवर्क – आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस  /   आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल  :  भारत की अर्थव्यवस्था की रफ्तार पहली तिमाही (अप्रैल-जून 2025) में कुछ धीमी रहने का अनुमान है। विशेषज्ञों का कहना है कि इस बार जीडीपी ग्रोथ दर 6.7% रह सकती है, जबकि पिछले साल की समान तिमाही में यह 7.8% थी।  ग्रोथ में इस गिरावट के पीछे कई कारण बताए जा रहे हैं। अमेरिका द्वारा भारतीय निर्यात पर 50% टैरिफ लगाना, शहरी मांग में कमी और निजी निवेश की सुस्ती इसकी प्रमुख वजहें हैं। गोल्डमैन सैक्स ने अनुमान लगाया है कि इससे जीडीपी पर लगभग 0.3% असर पड़ेगा, वहीं एचएसबीसी की रिपोर्ट के अनुसार यह असर 0.7% तक हो सकता है।

हालांकि, भारतीय रिजर्व बैंक ने अपनी हालिया मौद्रिक नीति में वित्त वर्ष 2025-26 के लिए जीडीपी अनुमान 6.5% पर बरकरार रखा है। भारतीय रिजर्व बैंक  का मानना है कि बेहतर मानसून, त्योहारों का सीजन और सरकारी नीतियां अर्थव्यवस्था को मजबूती देंगी।

सरकार भी इकोनॉमी को गति देने के लिए बड़े कदम उठाने की तैयारी में है। वित्त मंत्रालय जी.एस.टी स्लैब को 4 से घटाकर 2 करने की योजना बना रहा है। साथ ही, 25,000 करोड़ रुपए के निर्यात प्रोत्साहन मिशन और लोन पर मोरेटोरियम जैसे कदमों पर विचार हो रहा है।

पिछले 5 सालों में जीडीपी  में उतार-चढ़ाव देखने को मिला है। 2020 में कोविड महामारी के कारण -5.8% की गिरावट आई थी, लेकिन 2021 में 9.7% की तेज रिकवरी हुई। इसके बाद 2022 में 7.0%, 2023 में 8.2% और 2024 में 6.5% की ग्रोथ दर्ज की गई।

आज शाम 4 बजे जब आधिकारिक जीडीपी  आंकड़े जारी होंगे, तो यह साफ हो जाएगा कि अर्थव्यवस्था किस दिशा में बढ़ रही है |

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