इस्‍लामाबाद: साल 2014 के बाद से अटका सार्क सम्‍मेलन कब होगा कोई नहीं जानता है। भारत, पाकिस्‍तान, नेपाल, भूटान, बांग्‍लादेश, मालदीव और श्रीलंका जैसे देशों से बना दक्षिण एशियाई क्षेत्रीय सहयोग संगठन यानी सार्क अब अपने अस्तित्‍व की लड़ाई लड़ रहा है। साल 2016 में इसे पाकिस्‍तान में आयोजित होना था लेकिन उसी साल पहले पठानकोट में भारतीय वायुसेना के बेस और फिर उरी में आर्मी कैंप पर आतंकी हमला हुआ। इन हमलों की वजह से भारत ने इस सम्‍मेलन में हिस्‍सा लेने से इनकार कर दिया। आज अटल बिहारी वाजपेयी की जन्‍मतिथि के मौके पर सार्क, पाकिस्‍तान और वहां पर पनपे आतंकवाद का जिक्र न हो, ऐसा नामुमकिन है। साल 2002 में यानी ठीक 20 साल पहले भी यही हालात थे। उस समय पाकिस्‍तान के जनरल जो देश के राष्‍ट्रपति बन चुके थे, परवेज मुशर्रफ और वाजपेयी के सार्क में हुए हैंडशेक ने दुनिया को एक नई उम्‍मीद दी थी। सबको लगने लगा था कि रिश्‍तों पर जमी बर्फ शायद अब पिघल जाए। मगर सब भुल रहे थे कि वह पाकिस्‍तान था जो दो दशकों बाद भी वैसे का वैसा ही है। मुशर्रफ ने खुद उस हैंडशेक को अपने लिए काफी मुश्किल पल बताया था। आज जानिए इतिहास का वही रोचक किस्‍सा।