सीएनएन सेंट्रल न्यूज़ एंड नेटवर्क–आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस /आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल : यूपी चुनाव 2027: अमित शाह के सामने नाराज कार्यकर्ताओं और बिगड़े समीकरणों को साधने की चुनौती

लखनऊ। उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 की तैयारियों के बीच भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने संगठन को मजबूत करने और चुनावी रणनीति को धार देने की कवायद तेज कर दी है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह 30 और 31 अक्टूबर को लखनऊ में प्रस्तावित प्रदेश कार्यसमिति की बैठक में शामिल हो सकते हैं। इस बैठक को मिशन-2027 की तैयारियों के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। पार्टी के सामने नाराज कार्यकर्ताओं को साथ लाने, संगठनात्मक कमजोरियों को दूर करने और विभिन्न क्षेत्रों में बदले राजनीतिक समीकरणों के बीच अपनी पकड़ मजबूत करने की चुनौती है।

कार्यकर्ताओं की नाराजगी दूर करना प्राथमिकता भाजपा के सामने संगठन के भीतर असंतोष एक अहम चुनौती के रूप में सामने आया है। विभिन्न स्तरों पर संगठनात्मक नियुक्तियों को लेकर कुछ कार्यकर्ताओं ने नाराजगी जताई है। कई जगह पुराने और अनुभवी कार्यकर्ताओं की अपेक्षा नए चेहरों को प्राथमिकता दिए जाने की शिकायतें भी सामने आई हैं। ऐसे में पार्टी नेतृत्व के लिए कार्यकर्ताओं का भरोसा बहाल करना और संगठन में बेहतर तालमेल कायम करना महत्वपूर्ण होगा। बूथ स्तर पर सक्रियता बढ़ाने की तैयारी भाजपा चुनावी रणनीति में बूथ प्रबंधन और जमीनी स्तर पर कार्यकर्ताओं की भूमिका को अहम मान रही है। रिपोर्टों के मुताबिक, अमित शाह आगामी दिनों में बूथ अध्यक्षों और शक्ति केंद्र संयोजकों के साथ संवाद कर सकते हैं। पार्टी 2014 से अब तक हुए चुनावों के बूथवार नतीजों का विश्लेषण कर कमजोर क्षेत्रों की पहचान करने और वहां संगठन को सक्रिय बनाने पर भी जोर दे रही है।

जातीय समीकरण और सहयोगी दल भी अहम 2024 के लोकसभा चुनाव में उत्तर प्रदेश में भाजपा के प्रदर्शन के बाद पार्टी के सामने विभिन्न सामाजिक वर्गों के बीच समर्थन मजबूत करने की चुनौती है। विपक्षी दलों की जातीय भागीदारी और सामाजिक न्याय से जुड़ी राजनीति के बीच भाजपा को अपने सामाजिक आधार को बनाए रखने पर ध्यान देना होगा। इसके अलावा, एनडीए के सहयोगी दलों के साथ समन्वय और स्थानीय स्तर पर जनप्रतिनिधियों के प्रति असंतोष को दूर करना भी चुनावी तैयारियों का हिस्सा माना जा रहा है। मिशन-2027 के लिए रणनीतिक मंथन प्रस्तावित बैठक में पार्टी के वरिष्ठ पदाधिकारियों, जनप्रतिनिधियों और संगठन से जुड़े नेताओं के शामिल होने की संभावना है। इसमें संगठन की तैयारियों, बूथ प्रबंधन और चुनाव से पहले की प्राथमिकताओं पर चर्चा हो सकती है। हालांकि बैठक का विस्तृत आधिकारिक एजेंडा सार्वजनिक नहीं हुआ है। अमित शाह के संभावित दौरे को भाजपा की चुनावी तैयारियों में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। अब पार्टी के सामने चुनौती यह होगी कि रणनीतिक बैठकों और संगठनात्मक बदलावों को जमीनी सक्रियता में कैसे बदला जाए, ताकि कार्यकर्ताओं की नाराजगी दूर हो और चुनाव से पहले संगठन अधिक एकजुट दिखाई दे।


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