मुंबई । पहले सत्ता और अब पार्टी गंवाने के करीब पहुंचे शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे के सामने अब बड़ी समस्या खड़ी है, ‎‎जिसके कारण वह भाजपा के सामने सरेंडर कर सकते हैं। पिछले एक माह में भाजपा ने उद्धव को ऐसे चक्रव्यूह में फंसाया है, जिससे उनका बाहर निकलना नामुमकिन सा है।

सत्ता और शक्ति गंवाने के बाद उद्धव परिवार के सामने आ‎दित्य को सुर‎क्षित रखना सबसे बड़ा मुद्दा है। सुशांत सिंह राजपूत और उनकी मैनेजर दिशा साल्यान की मौत के मामले में भाजपा-शिंदे सरकार उद्धव पर शिकंजा कस सकती है। इस केस में आदित्य ठाकरे का नाम सामने आ चुका है। आदित्य ही उद्धव ठाकरे की सबसे कमजोर नस हैं।

इसलिए सरकार आदित्य के सहारे उद्धव को सरेंडर करने के प्रयास शुरु हो गए हैं। हाल ही में एमवीए गठबंधन की नीति से अलग जाकर राष्ट्रपति पद के लिए एनडीए प्रत्याशी द्रौपदी मुर्मू का समर्थन कर उद्धव ने भाजपा के साथ साफ्ट कॉर्नर रखने का संदेश दिया है। भाजपा उन्हें महाविकास अघाड़ी गठबंधन से अलग कर शिंदे के हाथ में शिवसेना सौंप देने तक शांत नहीं होगी। सुशांत सिंह राजपूत और दिशा साल्यान केस भाजपा के लिए तुरुप का पत्ता साबित हो रहा है।