सीएनएन सेंट्रल न्यूज़ एंड नेटवर्क–आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस /आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल : अमेरिकी संसद को संबोधित करते हुए पूर्व राष्ट्रपति Donald Trump ने दावा किया कि उनके कार्यकाल के दौरान भारत और पाकिस्तान के बीच संभावित सैन्य टकराव को रोकने में उनकी प्रशासन की महत्वपूर्ण भूमिका रही। उन्होंने कहा कि उस समय हालात बेहद तनावपूर्ण थे और दोनों देशों के बीच स्थिति युद्ध जैसी बन गई थी, लेकिन कूटनीतिक प्रयासों से तनाव कम कराया गया।
ट्रम्प ने अपने संबोधन में कहा कि अमेरिका ने दोनों देशों से लगातार बातचीत की और शांति बनाए रखने का आग्रह किया। उन्होंने यह भी कहा कि वैश्विक स्थिरता के लिए दक्षिण एशिया में शांति बेहद जरूरी है। उनके अनुसार, उस दौर में की गई पहल ने बड़े संघर्ष को टालने में मदद की।
हालांकि, भारत की ओर से पहले भी यह स्पष्ट किया गया है कि भारत-पाकिस्तान के मुद्दे द्विपक्षीय हैं और किसी तीसरे पक्ष की मध्यस्थता स्वीकार नहीं की जाती। पाकिस्तान ने अतीत में अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता की मांग की थी, लेकिन भारत ने इसे सिरे से खारिज किया है।
ट्रम्प के इस बयान के बाद राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे दावे अक्सर घरेलू राजनीतिक संदर्भ में भी दिए जाते हैं। दक्षिण एशिया में 2019 के बाद से कई बार तनाव की स्थिति बनी, लेकिन दोनों देशों ने सैन्य और कूटनीतिक स्तर पर संवाद बनाए रखा।
ट्रम्प का यह बयान एक बार फिर भारत-पाकिस्तान संबंधों और अमेरिकी भूमिका पर बहस को जन्म देता है। हालांकि वास्तविक स्थिति और कूटनीतिक प्रक्रियाएं कई स्तरों पर संचालित होती हैं, जिनमें सार्वजनिक बयानबाजी से अधिक जटिल रणनीतिक पहलू शामिल होते हैं।
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