हैदराबाद। तेलंगाना सरकार राज्य के इमामों और मुअज्जिनों को हर माह 5,000 रुपये मानदेय के रूप में देती है। इस सरकारी योजना से हजारों इमाम और मुअज्जिनों को फायदा हो रहा है। तेलंगाना वफ्क बोर्ड के जरिए राज्य की सभी मस्जिदों में यह राशि बांटी जाएगी। बता दें कि यह कोई नई योजना नहीं है। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर बरसों से इस तरह की सहायता दी जा रही है। तेलंगाना ही नहीं, देश के कई राज्यों में इमामों और मुअज्जिनों को इस तरह वेतन और मानदेय दिया जाता है, हालांकि मिलने वाली रकम अलग-अलग है।
तेलंगाना के एक इमाम हफीज मोहम्मद अब्दुल्ला ने कहा मैं पिछले 8-10 साल से मोहम्मद लेन की जामा मस्जिद में इमाम हूं। मैं सीएम केसीआर को 5,000 रुपये का मासिक वेतन देने के लिए धन्यवाद देता हूं। उम्मीद करता हूं कि यह लंबे समय तक जारी रहेगा। उन्होंने आगे कहा मैं (असदुद्दीन) ओवैसी और स्थानीय विधायक को भी धन्यवाद देता हूं। हमें इस तरह की जो आर्थिक मदद मिल रही है, वह अनोखी है। किसी सरकार ने हमारी इस तरह से देखभाल नहीं की, जैसी केसीआर कर रहे हैं। मैं अल्लाह से दुआ करता हूं कि वह उन्हें अच्छी सेहत बख्शे।
एक और इमाम मोहम्मद सलाउद्दीन आजम ने बताया कि मैं पिछले 40 साल से यहां इमाम के रूप में काम कर रहा हूं। मैं सीएम केसीआर को धन्यवाद देता हूं कि उन्होंने हमें हर महीने 5,000 रुपए का वेतन दिया। हमें यह सिर्फ केसीआर की वजह से मिल रहा है। मैं उनके लिए प्रार्थना करता हूं। बता दें कि 1993 में सुप्रीम कोर्ट ने सरकारी सहायता प्राप्त मस्जिदों में इमामों को सैलरी देने का आदेश दिया था। गैर सरकारी सहायता प्राप्त मस्जिदों के मामले में कोर्ट ने मानदेय देने को कहा था।
इसके बाद कई राज्यों में इमामों और मुअज्जिनों को वेतन की व्यवस्था है। दिल्ली में जून 2019 में वक्फ बोर्ड ने इमामों की सेलरी बढ़ाकर 18 हजार रुपये और मुअज्जिनों की 16 हजार रुपये कर दी थी। तब वक्फ बोर्ड ने बताया था कि वो 300 मस्जिदों के इमामों को सैलरी देता है। आंध्र प्रदेश की जगन मोहन रेड्डी सरकार ने जनवरी 2016 में इमामों को 5 हजार रुपये और मुअज्जिनों को 3 हजार रुपये महीना मानदेय देने की घोषणा की।
तेलंगाना में पिछले साल अगस्त में वक्फ बोर्ड ने 10 हजार इमामों के अलावा 6 हजार अन्य इमामों को 5-5 हजार का मानदेय देने का ऐलान किया था। इनके अलावा दिल्ली, हरियाणा, पंजाब, पश्चिम बंगाल, मध्य प्रदेश, राजस्थान, कर्नाटक, बिहार, झारखंड, यूपी समेत तमाम राज्य हैं, जहां इमामों और मुअज्जिनों को वेतन दिया जाता है।