सीएनएन सेंट्रल न्यूज़ एंड नेटवर्क–आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस / आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल: स्काईमेट के मुताबिक, देश के दक्षिण, पश्चिम, उत्तर-पश्चिम इलाके में अच्छी बारिश का अनुमान है।
मौसम का पूर्वानुमान लगाने वाली एजेंसी स्काईमेट ने मंगलवार को मानसून का अनुमान जाहिर किया। स्काईमेट के मुताबिक, 2024 में मानसून सामान्य रहेगा। एजेंसी ने मानसून सीजन के 102% (5% प्लस-माइनस मार्जिन) रहने की संभावना जाहिर की है।
जून से सितंबर तक चलने वाले 4 महीने के मानसून सीजन के लिए औसत (LPA) 868.6 मिमी है। स्काईमेट के मैनेजिंग डायरेक्टर जतिन सिंह ने कहा कि शुरुआत में अल-नीनो का असर रहेगा, पर दूसरे हाफ में इसकी भरपाई हो जाएगी।
इस साल स्काईमेट ने दूसरी बार मानसून का पूर्वानुमान जारी किया है। इससे पहले 12 जनवरी 2024 को भी स्काई मेट ने मानसून के सामान्य रहने की संभावना जाहिर की थी।
दक्षिण, पश्चिम और उत्तर-पश्चिम में अच्छी बारिश का अनुमान
स्काईमेट के मुताबिक, देश के दक्षिण, पश्चिम, उत्तर-पश्चिम इलाके में अच्छी बारिश का अनुमान है। इसके अलावा महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश में भी पर्याप्त बारिश हो सकती है। बिहार, झारखंड, ओडिशा और बंगाल में जुलाई और अगस्त के दौरान बारिश में थोड़ी कमी दर्ज की जा सकती है। जुलाई और अगस्त मानसून का सबसे सक्रिय समय होता है। उत्तर-पूर्व भारत में मानसून के शुरुआती सीजन में सामान्य से कम बारिश की आशंका है।
अच्छा संकेत- अल नीनो तेजी से ला नीना में बदल रहा
स्काईमेट के मुताबिक, अलनीनो काफी तेजी से ला लीना में बदल रहा है। यह अच्छा संकेत है। अलनीनो का ला नीना में बदलना अच्छे मानसून का कारण बनता रहा है। हालांकि, मानसून की शुरुआत में अल नीनो के बचेखुचे असर के कारण कुछ मानसून पर थोड़ा असर पड़ सकता है। लेकिन दूसरे चरण में मानसून भरपाई कर लेगा। अल नीना से ला नीना में परिवर्तन के चलते सीजन की शुरुआत में देरी हो सकती है। सीजन के दौरान अलग-अलग और असमान बारिश की संभावना है यानी कहीं ज्यादा और कहीं कम बारिश हो सकती है।
क्या होता है अल नीनो?
अल नीनो एक वेदर ट्रेंड है, जो हर कुछ साल में एक बार होता है। इसमें ईस्ट पैसिफिक ओशन में पानी की ऊपरी परत गर्म हो जाती है। WMO ने बताया कि इस क्षेत्र में फरवरी में औसत तापमान 0.44 डिग्री से बढ़कर जून के मध्य तक 0.9 डिग्री पर आ गया था।
ब्रिटानिका के मुताबिक अल-नीनो की पहली रिकॉर्डेड घटना साल 1525 में घटी थी। इसके अलावा 1600 ईस्वी के आसपास पेरू के मछुआरों ने महसूस किया कि समुद्री तट पर असामान्य रूप से पानी गर्म हो रहा है। बाद में रिसर्चर्स ने बताया था कि ऐसा अल-नीनो की वजह से हुआ था।
पिछले 65 सालों में 14 बार अल-नीनो प्रशांत महासागर में सक्रिय हुआ है। इनमें 9 बार भारत में बड़े स्तर पर सूखा पड़ा। वहीं, 5 बार सूखा तो पड़ा लेकिन इसका असर हल्का रहा।
मानसून होता क्या है?
एक क्षेत्र में चलने वाली हवाओं की दिशा में मौसमी परिवर्तन को मानसून कहते हैं। इस वजह से कई बार बारिश भी होती है या कई बार गर्म हवाएं भी चलती हैं। भारत के संदर्भ में देखा जाए तो हिंद महासागर और अरब सागर से ये हवाएं भारत के दक्षिण-पश्चिम तट पर आती हैं। ये हवाएं ठंडे से गर्म क्षेत्रों की तरफ बढ़ते हुए अपने साथ पानी वाले बादल भी लाती हैं जो भारत के साथ-साथ पाकिस्तान, अफगानिस्तान में भी बारिश करवाते हैं। भारत में जून से सितंबर तक मानसूनी हवाएं चलती रहती हैं।
मानसूनी हवाएं बनती कैसे हैं?
गर्मी के दिनों में जमीनी इलाकों की गर्म हवा ऊपर उठने लगती है इस वजह से जमीनी इलाकों में लो प्रेशर एरिया बनने लगता है
इसके विपरीत समुद्र में हाई प्रेशर एरिया बनने लगता है क्योंकि जमीन के मुकाबले वहां ठंड ज्यादा होती है।
समुद्र की ये हवा लो प्रेशर इलाकों यानी जमीन की तरफ बढ़ने लगती है। ये हवाएं अपने साथ समुद्र की नमी भी ले आती हैं। इन्हें ही मानसूनी हवाएं कहा जाता है।
भारत में ये हवाएं 2 दिशाओं से आती हैं। दक्षिण-पश्चिम और दक्षिण-पूर्व। हवाओं की दिशा के आधार पर ही दक्षिण-पश्चिमी और दक्षिण-पूर्वी मानसून कहा जाता है।
15 सितंबर से मानसून भारत के उत्तर पश्चिम भागों से विदा लेना शुरू करता है तथा 15 अक्टूबर तक मानसून पूरी तरह विदा हो जाता है।