सीएनएन सेंट्रल न्यूज़ एंड नेटवर्कआईटीडीसी इंडिया ईप्रेस / आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल: नौसेना और वायुसेना के लिए ब्रह्मोस मिसाइल, रडार समेत 39 हजार 125 करोड़ के हथियार और उपकरण खरीदे जाएंगे। रक्षा मंत्रालय ने इसके लिए पांच सैन्य सौदों पर दस्तखत किए हैं। इन बड़े स्वदेशी रक्षा सौदों से भारतीय सेना को मजबूती मिलेगी।

मंत्रालय की ओर से जारी बयान के अनुसार, ये सौदे विदेशी मुद्रा बचाएंगे और भविष्य में विदेशी मूल के उपकरण निर्माताओं पर निर्भरता कम करेंगे। पांच में से एक रक्षा सौदा मिग-29 विमानों के एयरो इंजन की खरीद के लिए हिंदुस्तान एयरोनाटिक्स लिमिटेड (HAL) के साथ किया गया है।

वहीं, क्लोज-इन हथियार प्रणाली (CIWS) और अत्याधुनिक रडार की खरीद के लिए लार्सन एंड टूब्रो लिमिटेड से दो करार हुए हैं। इसके अलावा, ब्रह्मोस मिसाइलों की खरीद के लिए ब्रह्मोस एयरोस्पेस प्राइवेट लिमिटेड (BAPL) के साथ दो सौदों को फाइनल किया गया।

ये हुए पांच कॉन्ट्रैक्ट

सबसे बड़ा कॉन्ट्रैक्ट 19,519 करोड़ रुपए का था। इसमें इंडो-रूसी जॉइंट वेंटर वाले ब्रह्मोस एयरोस्पेस से 450 किमी एक्सटेंडेड रेंज वाली 220 ब्रह्मोस सुपरसॉनिक की डील शामिल है।

988 करोड़ रुपए का एक अन्य कॉन्ट्रैक्ट ब्रह्मोस वर्टिकल लॉन्च सिस्टम का भी था।

प्राइवेट सेक्टर कंपनी L&T के साथ दो IAF कॉन्ट्रैक्ट साइन किए गए। पहली डील 7,669 करोड़ रुपए की थी, जिसके तहत क्लोज-इन वेपन सिस्टम की 61 फ्लाइट्स खरीदी जाएंगीं। दूसरी डील 5,700 करोड़ रुपए के 12 हाई पावर रडार के लिए की गई। इन रडार से चीन और पाकिस्तान सीमा पर तैनात मौजूदा लॉन्ग रेंज IAF रडार को रिप्लेस किया जाएगा।

पांचवां कॉन्ट्रैक्ट मिग-29 फाइटर्स के RD-33 एयरो इंजन के लिए था, जिसे हिन्दुस्तान एयरोनॉटिक्स 5,250 करोड़ रुपए में रूस की मदद से बनाएगा। इस डील के तहत 80 नए इंजन बनाए जाएंगे जो IAF फ्लीट के 60 ट्विन इंजन मिग-29 की ऑपरेशनल कैपेबिलिटी बढ़ाएंगे।

दुश्मनों के लिए आफत क्यों…

आरडी-33 एयरो इंजन मिग-29 के बाकी बचे जीवन में अहम होंगे। इनका निर्माण रूस ओईएम की ट्रांसफर आफ टेक्नोलाजी (TOT) लाइसेंस के जरिए होगा।

क्लोज-इन हथियार प्रणाली कम दूरी की आने वाली मिसाइलों और दुश्मन के विमानों का पता लगाने और उन्हें नष्ट करने के लिए रक्षा प्रणाली है।

नया रडार वायुसेना की रक्षा क्षमता को बढ़ाएगा। इसके आधुनिक सेंसर छोटे लक्ष्यों को भी साध लेंगे। निजी क्षेत्र के हाथों बनने वाली भारत में यह पहली रडार प्रणाली होगी।