आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस/आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शंघाई कोऑपरेशन समिट यानी SCO की वर्चुअल समिट को होस्ट कर रहे हैं। इसमें पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शाहबाज शरीफ, चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमिर पुतिन शामिल हुए हैं।
PM मोदी ने कहा- भारत का सिद्धांत पूरा विश्व एक परिवार है। हम SCO को भी अपना परिवार मानते हैं। पहली बार SCO मिलेट फूड फेस्टिवल, फिल्म फेस्टिवल, क्राफ्ट मेला, थिंक टैंक कॉन्फ्रेंस जैसी चीजें हुई हैं। SCO की पहली पर्यटन और सांस्कृतिक राजधानी वाराणसी में कार्यक्रम हुआ। SCO देशों के युवाओं की प्रतिभा को उजागर करने के लिए हमने कई कार्यक्रम किए हैं।
अफगानिस्तान पर भी बातचीत मुमकिन
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक- यूक्रेन जंग पर इस समिट में अहम बातचीत हो सकती है। इस जंग को 16 महीने से ज्यादा हो चुके हैं। रूस और यूक्रेन में से कोई न तो पीछे हटने तैयार है और न डिप्लोमेसी कामयाब हो पाई है।
इसके अलावा अफगानिस्तान पर बातचीत होना तय माना जा रहा है। वहां भुखमरी और महिलाओं से जुड़े मुद्दे सामने आ रहे हैं। माना जा रहा है कि अफगानिस्तान को कुछ राहत दी जा सकती है।
मोदी पिछले महीने अमेरिका के स्टेट विजिट पर गए थे। रूस के अलावा चीन और पाकिस्तान की भी इस पर पैनी नजर रही थी। पाकिस्तान ने तो बाकायदा भारत और अमेरिका के डिफेंस पैक्ट्स पर सवालिया निशान उठाते हुए डिप्लोमैटिक नोट भी जारी किया था। पिछली मीटिंग समरकंद में हुई थी। तब मोदी ने सिक्योरिटी, इकोनॉमी-ट्रेड और यूनिटी पर फोकस करने की अपील की थी।
भारत के लिए क्यों जरूरी है SCO
SCO भारत को आतंकवाद से लड़ाई और सिक्योरिटी से जुड़े मुद्दे पर अपनी बात मजबूती से रखने के लिए एक मजबूत मंच उपलब्ध कराता है। एक्सपर्ट्स के मुताबिक, SCO को लेकर भारत की तीन प्रमुख पॉलिसी हैं।
रूस से मजबूत रिश्ते बनाए रखना
पड़ोसी देशों चीन और पाकिस्तान के दबदबे पर लगाम और जवाब देना
सेंट्रल एशियाई देशों के साथ सहयोग बढ़ाना
SCO से जुड़ने में भारत का एक प्रमुख लक्ष्य इसके सेंट्रल एशियाई रिपब्लिक यानी CARs के 4 सदस्यों- कजाकिस्तान, किर्गिस्तान, तजाकिस्तान और उज्बेकिस्तान से आर्थिक संबंध मजबूत करना है।
इन देशों के साथ कनेक्टिविटी की कमी और चीन के इस इलाके में दबदबे की वजह से भारत के लिए ऐसा करने में मुश्किलें आती रही हैं।
2017 में SCO से जुड़ने के बाद इन सेंट्रल एशियाई देशों के साथ भारत के व्यापार में तेजी आई है। 2017-18 में भारत का इन चार देशों से व्यापार 11 हजार करोड़ रुपए का था, जो 2019-20 में बढ़कर 21 हजार करोड़ रुपए से ज्यादा हो गया।