आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस/आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल : सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान ने अमेरिका और इजराइल को चेतावनी दी है। उन्होंने कहा- गाजा में जमीनी हमले सिर्फ हिंसा को बढ़ाएंगे। इससे संकट और गहराएगा। पूरे मिडिल ईस्ट में तबाही होगी।

न्यूयॉर्क टाइम्स के मुताबिक, पिछले हफ्ते क्राउन प्रिंस सलमान ने रियाद में 10 अमेरिकी सांसदों से मुलाकात की थी। इस दौरान फिलिस्तीनी नागरिकों की सुरक्षा पर चर्चा हुई। 26 अक्टूबर को सांसद रिचर्ड ब्लूमेंथल ने कहा था- सऊदी अरब को लगता है कि स्थिरता लाने और लोगों की जान बचाने के लिए गाजा में जमीनी हमला नहीं होना चाहिए।

गाजा पर इजराइली हमला नहीं चाहते सऊदी क्राउन प्रिंस

न्यूयॉर्क टाइम्स के मुताबिक, सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान नहीं चाहते कि गाजा पर इजराइल हमला करे। वो स्पष्ट कर चुके हैं कि सऊदी अरब फिलिस्तीनियों के साथ खड़ा है।

सऊदी प्रेस एजेंसी के मुताबिक, क्राउन प्रिंस ने फिलिस्तीनी क्षेत्र के राष्ट्रपति महमूद अब्बासी, मिस्र के राष्ट्रपति अब्देल फतह अल-सिसी और जॉर्डन के किंग अब्दुल्लाह द्वितीय से भी बातचीत की थी। तीनों नेताओं के बीच इस बात पर सहमति बनी कि गाजा और उसके आसपास के इलाकों में इजराइल को आगे बढ़ने से रोकने के लिए कदम उठाना चाहिए।

7 अक्टूबर को शुरू हुई इजराइल-हमास जंग को लेकर मोहम्मद बिन सलमान एक्टिव जरूर हुए हैं लेकिन आक्रामक नहीं हैं। सऊदी अरब ने कहा है कि वो इजराइली सेना और अलग-अलग फिलिस्तीनी गुटों के बीच संघर्ष पर नजदीकी निगाह रखे हुए है। सऊदी अरब दोनों पक्षों से हिंसा छोड़ने की अपील करता है। साथ ही दोनों ओर के नागरिकों की सुरक्षा बहाल करने और संयम बरतने की अपील करता है।

जंग का एक पहलु ये भी…

हाल ही में कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया था कि सऊदी भी इजराइल को देश के तौर पर मान्यता दे सकता है। सऊदी और इजराइल के बीच ये करार अमेरिका की मध्यस्थता से होना था।

दरअसल, अमेरिका मिडिल ईस्ट में चीन के बढ़ते असर को काउंटर करना चाहता था। इसके लिए उसने सऊदी और इजराइल को फोकस में रखा। न्यूयॉर्क टाइम्स के मुताबिक प्लान सऊदी और इजराइल की नजदीकियां बढ़ाना था। जिससे मिडिल ईस्ट का कायाकल्प किया जा सके।

इसके बाद वॉशिंगटन में अमेरिकी नेशनल सिक्योरिटी एडवाइजर (NSA) जैक सुलिवन और मोसाद चीफ डेविन बार्निया के बीच लंबी बातचीत हुई। इस बातचीत में सिर्फ यह डिस्कस किया गया कि सऊदी अरब और इजराइल के डिप्लोमैटिक रिलेशन कैसे और कितने जल्द शुरू कराए जा सकते हैं।

27 जुलाई को वॉशिंगटन पोस्ट ने एक रिपोर्ट में बताया था कि अमेरिकी NSA जैक सुलिवन अचानक सऊदी अरब पहुंचे हैं। अमेरिकी न्यूज वेबसाइट एक्सिओस के मुताबिक इस मीटिंग का सिर्फ एक एजेंडा था कि सऊदी अरब को अब्राहम अकॉर्ड में शामिल किया जाए। इसी अकॉर्ड के तहत UAE और बहरीन समेत चार गल्फ कंट्रीज ने इजराइल को मान्यता दी थी।

बाद में व्हाइट हाउस ने एक बयान में कहा- हम चाहते हैं कि सऊदी अरब इजराइल को मान्यता दे। इसके लिए हर मुमकिन कोशिश जारी है। एक्सपर्ट्स का मानना है कि हमास ने अमेरिका के इस प्लान को फेल करने के लिए इजराइल पर हमला किया।

हालांकि, अभी जो हालात हैं उन्हें देखते हुए अमेरिकी और इजराइली अधिकारियों को लगता है कि सऊदी अब भी इजराइल को देश के तौर पर मान्यता दे सकता है।