आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस/आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल : इजराइल-हमास जंग के बीच ईरान के राष्ट्रपति इब्राहिम रईसी ने सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान से फोन पर बात की। फरवरी में चीन की तरफ से समझौता कराए जाने के बाद ये पहला मौका था, जब दोनों देशों के नेताओं ने बात की। ईरान के स्टेट मीडिया के मुताबिक, बातचीत के दौरान राष्ट्रपति रईसी और सऊदी क्राउन प्रिंस के बीच फिलिस्तीन के खिलाफ वॉर क्राइम रोकने पर सहमति बनी।
मोहम्मद बिन सलमान ने कहा- सऊदी जंग को रुकवाने के लिए हर संभव कोशिश कर रहा है। हम इसके लिए सभी क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय पार्टीज से बात कर रहे हैं। सऊदी अरब ने इस बात पर भी जोर दिया कि जंग में आम नागरिकों को टारगेट नहीं किया जाना चाहिए।
वहीं इस फोन कॉल पर अमेरिका के विदेश मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा- हम हमास के खिलाफ जंग में इजराइल के साथ हैं। इस बीच हम लगातार सऊदी अरब के लीडर्स के संपर्क में हैं।
सऊदी बोला- हमारा मकसद फिलिस्तीनियों को उनका हक दिलवाना
इजराइल हमास जंग के बीच कुछ देश इजराइल तो कुछ फिलिस्तीनियों के पक्ष में हैं। क्राउन प्रिंस ने 2 दिन पहले कहा था कि सऊदी अरब फिलिस्तीनियों के साथ खड़ा है। उनका मकसद फिलिस्तीन के लोगों को उनके अधिकार दिलवाना है। फिलिस्तीनियों को भी एक सभ्य जीवन और शांति का हक है, जिससे वो अपने सपने पूरे कर सकें।
दूसरी तरफ, ईरान ने जंग की शुरुआत से हमास के हमलों का समर्थन किया है। ईरान के सुप्रीम लीडर अली खामेनेई ने 10 अक्टूबर को कहा था- हमास के हमले में इजराइल की कुछ अहम जगहों को नुकसान पहुंचा है। उनके लिए दोबारा खड़ा होना इतना आसान नहीं होगा। इजराइल में जो भी हो रहा है, उसके लिए वो खुद जिम्मेदार हैं।
रिपोर्ट में दावा- हमास ने ईरान के साथ मिलकर की हमले की प्लानिंग
अमेरिकी अखबार वॉल स्ट्रीट जर्नल ने अपनी एक रिपोर्ट में दावा किया था कि ईरान के सुरक्षा अधिकारियों ने इजराइल पर हमले की प्लानिंग में हमास की मदद की थी। इसके बाद उन्होंने 2 अक्टूबर को बेरूत में एक बैठक में हमले के लिए हरी झंडी दे दी थी।
WSJ के मुताबिक, ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स के अधिकारी अगस्त से हमास के साथ मिलकर इजराइल पर 1973 के बाद जमीन, हवा और समुद्र के रास्ते अब तक के सबसे बड़े हमले की प्लानिंग कर रहे थे।
7 अक्टूबर को इजराइल पर हमास के हमले के बाद ईरान में लोगों ने जश्न भी मनाया था। लोग आतिशबाजी करते नजर आए थे। ईरान ने इन सभी दावों को सिरे से खारिज किया था। उसने कहा था कि हमास के हमले में उसकी कोई भूमिका नहीं है।
चीन ने सऊदी-ईरान में करवाया था समझौता
इससे पहले जून में 7 साल बाद ईरान ने सऊदी अरब में अपनी एम्बेसी खोली थी। मार्च में दोनों देशों ने एम्बेसी खोलने को लेकर समझौता हुआ था। इसके तहत 2016 के बाद दोनों देश एक-दूसरे के मुल्क में अपनी-अपनी एम्बेसी फिर खोलने के लिए राजी हो गए थे। ईरान के विदेश मंत्री हुसैन आमिर अब्दुल्लाह ने लेबनान की राजधानी बेरूत में इसकी जानकारी दी थी। दोनों देशों के बीच ये समझौता चीन ने कराया था।