सीएनएन सेंट्रल न्यूज़ एंड नेटवर्कआईटीडीसी इंडिया ईप्रेस / आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल : कलकत्ता हाईकोर्ट ने सोमवार को ममता बनर्जी सरकार से कहा कि संदेशखाली केस में TMC लीडर शेख शाहजहां को गिरफ्तार किया जाए। हाईकोर्ट में एक वकील ने याचिका लगाई थी कि कई लोग संदेशखाली जा रहे हैं। कुछ को गिरफ्तार किया जा रहा है, तो कुछ को मालाएं पहनाई जा रही हैं। वकील ने अपील की कि हाईकोर्ट संदेशखाली की जांच के लिए एक स्वतंत्र कमेटी गठित करे।

अदालत ने कहा कि हम ऐसा करेंगे, लेकिन हम चाहते हैं कि राज्य सरकार, पुलिस, CBI और ED कोर्ट में मौजूद रहे। साथ ही अब तक फरार चल रहा जिला परिषद अध्यक्ष शेख शाहजहां भी। हमने पढ़ा कि उसने एंटीसिपेटरी बेल के लिए एप्लिकेशन दी थी, जिसे खारिज कर दिया गया।

अदालत ने पुलिस को भी फटकार लगाई। कहा कि 4 साल पुराना मामला है। FIR को चार्जशीट में तब्दील होने में 4 साल लग गए?

संदेशखाली में TMC नेता शेख शाहजहां और उसके दो साथियों शिबू हाजरा और उत्तम सरदार पर आरोप है कि वे महिलाओं का गैंगरेप कर रहे थे। इस केस में शिबू हाजरा और उत्तम सरदार समेत 18 लोगों को पुलिस ने गिरफ्तार किया है जबकि शाहजहां अब तक फरार है।

शाहजहां शेख TMC का डिस्ट्रिक्ट लेवल का नेता है। राशन घोटाले में ED ने 5 जनवरी को उसके घर पर रेड की थी। तब शाहजहां के 200 से ज्यादा सपोर्टर्स ने टीम पर अटैक कर दिया। अफसरों को जान बचाकर भागना पड़ा था। तभी से शाहजहां शेख फरार है। हालांकि संदेशखाली के लोगों का कहना है कि वो कहीं नहीं गया, यहीं है।

कोर्ट रूम LIVE…

एमिकस क्यूरी (कोर्ट की तरफ से नियुक्त वकील): कई रिपोर्ट्स में यह कहा जा रहा है कि शाहजहां शेख की गिरफ्तारी इसलिए नहीं हो रही है, क्योंकि कोर्ट ने इस पर स्टे लगा रखा है। इसे स्पष्ट किया जाना चाहिए।

चीफ जस्टिस: हमने कोई ऑर्डर नहीं दिए। ये कौन सा ऑर्डर है?

एमिकस क्यूरी (कोर्ट की तरफ से नियुक्त वकील): ऐसा कोई ऑर्डर नहीं है। क्या कोई स्टे लगाया गया है? हमने केवल SIT के गठन पर रोक लगाई थी। शाहजहां शेख की गिरफ्तारी पर रोक का कोई ऑर्डर नहीं है। ऐसा ऑर्डर कैसे दिया जा सकता है कि उसे गिरफ्तार नहीं करो, वो भी 20 दिन तक। उसकी गिरफ्तारी नहीं हो पाई है। हम रजिस्ट्री डिपार्टमेंट को आदेश देते हैं कि बड़े सर्कुलेशन वाले बांग्ला और इंग्लिश न्यूज पेपर में पब्लिक नोटिस जारी किया जाए।

एमिकस क्यूरी (कोर्ट की तरफ से नियुक्त वकील): क्या हालात की जांच के लिए मैं संदेशखाली जा सकता हूं?

चीफ जस्टिस: नहीं, अभी आप वहां मत जाइए।

एडवोकेट प्रियंका टिबरवाल (भाजपा): एक और गंभीर बात है। मैंने अपनी याचिका में उन पीड़िताओं का नाम लिस्ट किया है, जिनके साथ अन्याय हुआ है। पुलिस मौजूद है, लेकिन पीड़ितों का कहना है कि अगर वो उनके पास गईं तो वैसी ही समस्याओं का सामना करना पड़ेगा। पुलिस पर भी मिलीभगत का आरोप है। कई पीड़िताएं बोलीं कि पुलिस ने ही उनसे कहा कि शेख शाहजहां ही आज से तुम्हारा पति है। पीड़िताएं पुलिस के पास कैसे जा सकती हैं?

चीफ जस्टिस: हम डायरेक्टर लीगल सर्विस अथॉरिटी (DLSA) के जरिए उनकी बात सुन सकते हैं और वो भी बिना उनकी पहचान उजागर किए। आप पीड़िताओं से ऐसा करने के लिए कह सकती हैं। एडिशनल डिस्ट्रिक्ट जज जाकर वहां कैंप लगा सकते हैं।

एडवोकेट प्रियंका टिबरवाल (भाजपा): धारा 144 लागू है और इसकी वजह से आरोपी बच रहे हैं। पीड़ित हाउस अरेस्ट हैं। वो बोल नहीं पा रहे हैं। रूलिंग पार्टी के मंत्री वहां जा रहे हैं और वो पीड़ितों को डरा रहे हैं। उन्हें संदेशखाली जाने की इजाजत कैसे मिल गई? अगर वहां किसी को जाने की इजाजत नहीं है तो रूलिंग पार्टी के नेताओं को भी नहीं होनी चाहिए |

अटॉर्नी जनरल (बंगाल सरकार): 2023 में इस मामले में 43 FIR दर्ज हुई थीं। 42 में चार्जशीट दाखिल हो चुकी हैं। जमीन हड़पने के मामले में 7 FIR हुई थीं और सभी में चार्जशीट पेश की जा चुकी है। 8 फरवरी 2024 से 8 नए केस शुरू हुए हैं। अब तक 15 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है।

चीफ जस्टिस: एक FIR को चार्जशीट में तब्दील होने में 4 साल लग गए। पिछले कई साल से ये मुद्दा गरमा रहा था और अचानक ये फट पड़ा।

एडवोकेट प्रियंका टिबरवाल (भाजपा): इस पूरे मामले की जांच CBI से कराई जानी चाहिए।

चीफ जस्टिस: हम ऐसा कराएंगे, लेकिन 4 साल तक आप क्या कर रहे थे। आपका क्लाइंट क्या कर रहा था। क्या वो वहां गया था। जब कोर्ट ने यह मामला उठाया तो आप सब आने लगे। ये सब 4 साल से चल रहा था और आप 2024 में PIL फाइल करने आए।

भाजपा फिर हाईकोर्ट गई, संदेशखाली जाने की इजाजत मांगी

भारतीय जनता पार्टी संदेशखाली जाने के लिए एक बार फिर कलकत्ता हाईकोर्ट गई है। भाजपा नेताओं को बंगाल पुलिस ने संदेशखाली जाने की इजाजत नहीं दी थी। स्वतंत्र फैक्ट फाइंडिंग टीम रविवार को संदेशखाली का दौरा करने गई थी, लेकिन टीम के सदस्यों को पुलिस ने रोक दिया। विवाद बढ़ा तो छह लोगों को हिरासत में ले लिया गया।