सीएनएन सेंट्रल न्यूज़ एंड नेटवर्क–आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस / आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल : रक्षा मामलों की संसदीय स्थायी समिति ने एक रिपोर्ट पेश की है। समिति ने रक्षा मंत्रालय से सिफारिश की है कि ड्यूटी के दौरान शहीद होने वाले अग्निवीरों के परिवारों को भी वही लाभ मिलना चाहिए जो नियमित सैन्य कर्मियों के शहीद होने पर उनके परिवारों को मिलता है।
समिति ने कहा है कि मौजूदा प्रावधानों के तहत ड्यूटी के दौरान शहीद होने वाले अग्निवीरों के परिवारों को पेंशन जैसे नियमित लाभ नहीं मिलता है। अग्निवीरों के परिवार की स्थिति को देखते हुए प्रावधान में बदलाव किए जाएं। समिति ने कहा है कि ड्यूटी के दौरान शहीद होने वाले सैनिकों के परिवारों को दी जाने वाली अनुग्रह राशि प्रत्येक श्रेणी में 10 लाख रुपए तक बढ़ाई जाए।
रक्षा मंत्रालय ने समिति को बताया है कि मुआवजे की राशि सैनिक किस स्थिति में शहीद हुआ है उसके आधार पर दी जाती है।
ऑन ड्यूटी दुर्घटना होने, आतंकवादियों, असामाजिक तत्वों द्वारा की गई हिंसा के कोई सैनिक शहीद होता है तो 25 लाख रुपए का मुआवजा दिया जाता है।
सीमा पर होने वाली झड़पों, उग्रवादियों-कट्टरपंथियों से मुठभेड़, समुद्री डाकुओं आदि के खिलाफ कार्रवाई में शहीद होने पर 35 लाख रुपए का मुआवजा दिया जाता है।
युद्ध में दौरान दुश्मन की कार्रवाई में किसी सैनिक की शहीदी होती है तो मुआवजे में 45 लाख रुपए की राशि दी जाती है।
मुआवजा राशि में 10 लाख रुपए का इजाफा हो
समिति ने रक्षा मंत्रालय से कहा है कि सरकार को सभी स्थितियों में सैनिक के शहीद होने पर मुआवजे की राशि 10 लाख रुपए तक बढ़ाने पर गंभीरता से विचार करना चाहिए। किसी भी श्रेणी के तहत न्यूनतम मुआवजा राशि 35 लाख रुपए और अधिकतम मुआवजा राशि 55 लाख रुपए होनी चाहिए।
अग्निपथ योजना क्या है और इसे क्यों शुरू किया गया?
सरकार ने 2022 में अग्निपथ योजना लॉन्च की। इसके तहत आर्मी, नेवी और एयर फोर्स में चार साल के लिए नौजवानों को कॉन्ट्रैक्ट पर भर्ती किया जाता है। चार साल में छह महीने की ट्रेनिंग भी शामिल है। चार साल बाद जवानों को उनकी कार्यक्षमता के आधार पर रेटिंग दी जाएगी। इसी मेरिट के आधार पर 25% अग्निवीरों को परमानेंट सर्विस में लिया जाएगा। बाकी लोग वापस सिविल दुनिया में आ जाएंगे।