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छत्तीसगढ़ के दुर्ग में गुरुवार दोपहर हुए सड़क हादसे के बाद देर रात भी जमकर हंगामा हुआ। 9वीं क्लास की छात्रा की मौत के बाद कुम्हारी क्षेत्र में दुर्ग-रायपुर हाईवे पर प्रदर्शन कर रहे लोगों पर पुलिस ने जमकर लाठियां भांजी। पहले तो लोगों को जेल भेजने की धमकी देकर जाम खुलवाया गया। जब लोग घर लौट गए तो फोर्स उरला गांव पहुंच गई। वहां घर के बाहर जो मिला उसे दौड़ा-दौड़ा कर पीटा गया। पुलिस ने पूर्व सैनिक से लेकर पार्षद तक को नहीं छोड़ा।

दरअसल, जंजगिरी पेट्रोल पंप के पास गुरुवार दोपहर 12 बजे फ्लाई ओवर बना रही कंपनी की कंक्रीट मिक्सर मशीन ने छात्रा खुशी साहू (15) को कुचल दिया था। खुशी घर से अपने स्कूल जाने के लिए साइकिल से निकली थी। हादसे के बाद गुस्साए ग्रामीणों ने नेशनल हाइवे पर जाम लगा दिया। लोग 40 लाख रुपए मुआवजा देने की मांग कर रहे थे। पुलिस अफसरों ने ग्रामीणों को समझाने का प्रयास किया, पर वह नहीं माने।करीब 9 घंटे तक हाईवे जाम रहा।

जो घर के बाहर मिला, उसे दौड़ाकर पीटा

इसके बाद रात करीब 8.30 बजे पुलिस अफसर मौके पर पहुंच गए। उन्होंने प्रदर्शन कर रहे ग्रामीणों की वीडियो ग्राफी कराने का आदेश दिया और सभी के खिलाफ FIR के निर्देश दिए। इससे ग्रामीण डर गए और धीरे-धीरे कर वहां से जाने लगे। इसके बाद जाम खुल गया। ग्रामीण भी गांव लौट गए। आरोप है कि इसके बाद अफसर गांव में फोर्स लेकर पहुंच गए। इस दौरान जो भी घर से बाहर मिला, उसे दौड़ा-दौड़ा कर बुरी तरह से लाठियों से पीटा गया।

गालियां दीं, लाठियां मारी, पार्षद बेहोश हुए

उरला गांव निवासी पूर्व सैनिक रोमनाथ वर्मा का कहना है कि वह खाना खाकर रात में अपने घर के पास खड़े थे। अचानक 300 से अधिक पुलिसकर्मी पहुंचे। कुछ पुलिस वाले उनके पास आए और उन्हें लाठी से मारना शुरू कर दिया। रोमनाथ ने अपना परिचय भी दिया, इसके बाद भी पुलिस वालों ने गाली-गलौज करते हुए उसे 30-40 लाठियां मारी। इससे उन्हें चोट आई है। उन्होंने भूतपूर्व सैनिक संगठन से इस लड़ाई में साथ देने की मांग की है। पुलिस ने यहां के पार्षद ईश्वर साहू को इतना मारा कि वो बेहोश हो गए। वहीं पूर्व ग्रामीण अध्यक्ष गिरवर साहू को अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा।

पहले भी बजरंगियों पर भांज चुकी है लाठी
दुर्ग पुलिस द्वारा लोगों पर लाठी भांजने का ये पहला मामला नहीं है। इससे पहले भी जनवरी 2022 में बजरंगियों पर लाठी भांजी थी। बजरंग दल के कार्यकर्ता दुर्ग जिला मुख्यालय में अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन कर रहे थे। उन्होंने सड़क पर बैठकर धरना देना शुरू किया तो अफसर ने ही अपने हाथों में लाठी ली और उनकी पिटाई करना शुरू कर दिया था।