आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस/आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल : हैंडलूम और टेक्सटाइल के प्रोडक्ट्स बनाने में विश्व में अपना सिक्का जमा चुके पानीपत के उद्योगपतियों ने अब देश की सुरक्षा करने वाले फौजियों के लिए जूतों का कपड़ा बनाने वाली मशीनें बनाने का काम भी शुरू कर दिया है। एक तरफ भारत सरकार डिफेंस में आत्मनिर्भरता के लिए हथियार बनाने का काम कर रही है।

वहीं, पानीपत के उद्यमियों ने भी कंधे से कंधा मिलाकर काम करना शुरू कर दिया है। स्पेशल क्राफ्ट, रोववर्स, मिजाइल, सैनिकों के काम आने वाला शूज तक का कपड़ा बनाने के लिए पानीपत के उद्यमियों ने मशीनें बनाकर देनी शुरू कर दी है।

लगभग 20 उद्योग टेक्सटाइल मशीनरी बनाने में लगे

पानीपत में टेक्सटाइल मशीनरी बनाने वाले 20 उद्योग लगे हुए हैं। इनमें बेडशीट, कर्टेन क्लाथ, कारपेट बनाने की मशीनें बनती है। पहले एक माह में 3 हजार मीटर कपड़ा बनता था। यहां के उद्यमियों ने ऐसी मशीनें बना दी है, जिन पर 3 हजार मीटर कपड़ा एक ही दिन में बनता है।

दशमेश इंडस्ट्री बना रही मशीनें

साल 1979 से टेक्सटाइल मशीनरी बनाने वाले दशमेश जेकार्ड एवं पावरलूम ने डिफेंस की जरूरतों को पूरा करने के लिए मशीनें बनानी शुरू की है। देशमेश इंडस्ट्री के मालिक रामजीत सिंह बताते हैं कि उनकी शुरू से ही नए-नए प्रोडक्ट बनाने में रुचि रही है।

उन्होंने ही जूट, नारियल की रस्सी से धागा बनाने की मशीन बनाई। जिनसे कारपेट बनते हैं। हाथ से बनने वाले उत्पाद को मशीनरी पर डायवर्ट करवाने का काम किया। इसी कारण से पानीपत में उद्यमी विदेशों से प्रतिस्पर्धा में टिक पा रहे हैं।

कई मशीनें डिफेंस को दे चुका पानीपत

हैंड नोटिड कारपेट बनते थे, उनके स्थान पर ऑटोमैटिक मशीनों पर कारपेट बनाए जा रहे हैं। हमारा एक ही लक्ष्य रहा है कि अपने लिए हर कोई करता है, ऐसा काम करना चाहिए जो देश के हित में हो। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश रक्षा के मामले में आत्मनिर्भर बनने का जो बीड़ा उठाया है। उसके तहत हम डिफेंस की जरूरतों के हिसाब से मशीनरी बना रहे हैं। इसके अच्छे रिस्पॉन्स भी मिल रहे है। कई मशीनें डिफेंस को दे चुके हैं।

यूरोप तक जाती हैं पानीपत की मशीनें, मिल रही सराहना

रामजीत बताते हैं कि टेक्निकल टेक्सटाइल, इंडस्ट्रियल टेक्सटाइल, स्पेशल प्रपज के लिए बनाए जाने वाले प्रोडक्ट के लिए हम मशीनें बना रहे हैं। हमने बॉर्डर लूम 12 मीटर चौड़ाई तक का कपड़ा बनाने की मशीन बनाने में सफलता प्राप्त कर ली।

अब तक 3-4 मीटर चौड़ाई तक कपड़ा बनाने की मशीन ही बन रही थी। अब हमारी मशीनें यूरोप तक जाने लगी है। डिफेंस के अधिकारी अपनी जरूरत हमें बता रहे हैं उसके मुताबिक हम मशीन बना रहे हैं। डिफेंस से हमें पूरा सहयोग मिल रहा है और उद्यमी भी उनकी जरूरतों पर खरा उतर रहे है।