आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस/आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल: पाकिस्तान में शुक्रवार को बलूस्चितान और खैबर पख्तूनख्वा में 2 घंटे में 2 आतंकी हमले हुए। इनमें 55 से ज्यादा लोगों की मौत हो गई। हमलावर आत्मघाती थे। पाकिस्तान के आतंकी संगठनों बीच इस तरह के आत्मघाती हमलावरों की खरीद-फरोख्त करते होती है। दूसरे हमलावरों के मुकाबले इन्हें ज्यादा इज्जत मिलती है। इन्हें 40 दिनों तक ट्रेन कर हमलों के लिए तैयार किया जाता है।
स्टोरी में जानेंगे कि ये आत्मघाती हमलावर कहां से आते हैं, उन्हें कैसे और कहां ट्रेनिंग दी जाती है… इसके लिए भास्कर ने TTP, यानी तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान के प्रवक्ता रहे एहसान उल्लाह, ISIS, यानी इस्लामिक स्टेट ऑफ इराक एंड सीरिया और BLA, यानी बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी में काम कर चुके आतंकियों से सवाल किए हैं। TTP और BLA के आतंकियों ने नाम न बताने की शर्त पर सभी जवाब दिए हैं।
सवाल 1: आत्मघाती हमलावरों को कैसे चुना जाता है?
जवाब: पाकिस्तान में जिन्हें आत्मघाती हमलावर बनना होता है, वो खुद ही इन संगठनों से संपर्क करते हैं। ज्यादातर वो लोग होते हैं, जिनके खुद के साथ या उनके परिवार के साथ पाकिस्तान की सेना ने जाने या अनजाने में अत्याचार किया होता है। काफी सारे आत्मघाती हमलावर वो हैं जिनके परिवार वालों को फौज ने उठा लिया था और तब से उनके बारे में कोई जानकारी नहीं है।
फौज से इसका बदला लेने के लिए वो आत्मघाती हमलावर बन जाते हैं। कुछ लोग अपने धर्म की खातिर और ‘जिहाद’ करने के लिए भी आत्मघाती हमलावर बनते हैं। हमलावर ज्यादा उम्रदराज नहीं होते हैं। ज्यादातर की उम्र 18-25 के बीच होती है। TTP के पास अभी कम से कम 120 आत्मघाती हमलावर हैं।
सवाल 2: आत्मघाती हमलावरों को ट्रेनिंग कैसे दी जाती है?
जवाब: पाकिस्तान में सभी आतंकी संगठनों में इस तरह के हमलावरों की ट्रेनिंग के लिए एक अलग डिपार्टमेंट है। इसे वो लोग चलाते हैं जिन्हे संगठन में काम करते हुए काफी समय हो गया है। उन पर संगठन के टॉप लीडर भरोसा करते हैं।
जो आत्मघाती बनने का मन बना लेते हैं, उनको संगठन के बाकी लोगों से अलग रखा जाता है और उनकी ज्यादा इज्जत होती है। उनको शहादत, जन्नत और धर्म के बारे में बताया जाता है। ताकि वो अपने मिशन के लिए मानसिक रूप से और तैयार हो जाएं।
TTP और ISIS के अलवा बलूचिस्तान लिबरेशन फ्रंट यानी BLA भी आत्मघाती हत्यारों का इस्तेमाल करता है। ये एक ऐसा संगठन है जिसके आत्माघाती दल में महिलाएं भी शामिल हैं।
पाकिस्तान के सुरक्षा से जुड़े अधिकारी ने बताया है कि BLA ने इन महिला दस्तों का इस्तेमाल कर फौज को काफी नुकसान पहुंचाया है। अमूमन महिलाओं पर सेना के जवान ज्यादा शक नहीं करते और उनकी जांच भी संयमित ढंग से होती है।
तीनों आतंकी संगठन आत्मघाती हमलावरों को तैयार करने के लिए 40 दिन की ट्रेनिंग देते हैं। TTP और ISIS के आतंकियों को ये भी बताया जाता है कि फिदायीन जैकेट को कैसे पहनें, उसको कैसे छुपाना है, कैसे एक्टिवेट करना है। इसके अलावा उन्हें बंदूक चलाने से लेकर अपने टारगेट तक पहुंचने की तरकीबें भी सिखाई जाती हैं।
TTP के एक वरिष्ठ कमांडर के मुताबिक काफी दिनों तक कमांडर तारीक रफीक उर्फ ‘बटन खराब’ आत्मघाती हमलावरों को ट्रेन करता था। नए आत्मघाती हमलावरों को कौन तैयार करता है, इसका जवाब देने से TTP के अधिकारी ने मना कर दिया।