आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस/आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल: इजराइली मीडिया में पिछले हफ्ते एक खबर आई और इसने दुनिया का ध्यान खींचा। खबर थी कि पाकिस्तान की खुफिया एजेंसियां दुश्मन मुल्क इजराइल में बने फोन हैकिंग डिवाइस या टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल कर रही हैं।
एक रिपोर्ट के मुताबिक- पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI और फेडरल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (FIA) के अलावा कुछ पुलिस यूनिट्स भी इस टेक्नोलॉजी का धड़ल्ले से इस्तेमाल कर रही हैं और ये काम 2012 से जारी है। हैरानी की बात यह है कि पाकिस्तान दुनिया के उन चुनिंदा मुल्कों में शुमार है, जिसने इजराइल को मान्यता नहीं दी है। मान्यता तो सऊदी अरब ने भी इजराइल को नहीं दी है, लेकिन बैकडोर डिप्लोमैसी के तहत वो लगातार इजराइल के संपर्क में रहता है।
इजराइली अखबार का खुलासा
पिछले दिनों इजराइल के अखबार ‘द हेरात्ज’ ने एक इन्वेस्टिगेटिव रिपोर्ट पब्लिश की थी। इसके मुताबिक- पाकिस्तान की इंटेलिजेंस एजेंसियों के अलावा कुछ पुलिस यूनिट भी इजराइल की फोन हैकिंग टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल कर रही हैं। यह सिलसिला 2012 में शुरू हुआ था और तब से बदस्तूर जारी है।
इस रिपोर्ट के मुताबिक- पाकिस्तान ने सबसे पहले 2012 में इजराइल की टेक्नोलॉजी फर्म सेलिब्रिटी से कॉन्ट्रैक्ट किया था। सबसे पहले इसका UFED प्रोडक्ट खरीदा गया। इसका इस्तेमाल खासतौर पर लॉ एन्फोर्समेंट एजेंसीज करती हैं। दुनिया में कई देशों की इंटेलिजेंस एजेंसियों के पास इजराइली फर्म की यह स्पेशल स्पाय डिवाइस मौजूद हैं।
UFED के जरिए पासवर्ड प्रोटेक्टेड फोन का भी डेटा चुराया जा सकता है। इसके अलावा टैक्स्ट मैसेज, कॉल, वीडियो और फोटो भी हासिल किए जा सकते हैं। पाकिस्तान की खुफिया एजेंसीज अपने ही देश में भी इन डिवाइस का इस्तेमाल करती रही हैं।
खरीद के लिए सिंगापुर चुना
रिपोर्ट में एक दिलचस्प खुलासा किया गया है। इसके मुताबिक- पाकिस्तान की खुफिया एजेंसीज ने UFED और बाकी प्रोडक्ट्स को 2019 में सिंगापुर से खरीदना शुरू किया। इसकी वजह यह थी कि उसे सच सामने आने का डर था। सिंगापुर में इस इजराइली फर्म की एक यूनिट मौजूद है।
पाकिस्तान सरकार और वहां खुफिया एजेंसियों ने अब तक इस रिपोर्ट को नकारा नहीं है। एक इजराइली एक्सपर्ट के मुताबिक- पाकिस्तान इस मामले को दबा तो सकता है, लेकिन नकार नहीं सकता। इसकी वजह यह है कि इस टेक्नोलॉजी को पाकिस्तान भेजे जाने के तमाम रिकॉर्ड्स मौजूद हैं। इनमें से कुछ रिपोर्ट में बतौर सबूत दिए भी गए हैं और इन्हें शिपमेंट कैटेगरी में रखा गया है।