सीएनएन सेंट्रल न्यूज़ एंड नेटवर्क – आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस  /  आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल   /   नई दिल्ली  : म्यूचुअल फंड में निवेश करना आजकल आम निवेशकों के बीच काफी लोकप्रिय हो चुका है। यह एक ऐसा साधन है, जिसमें बाजार के जानकार आपके पैसे को विभिन्न कंपनियों और सेक्टरों में रिसर्च के आधार पर निवेश करते हैं। हालांकि, इस सुविधा के लिए आपको एक शुल्क चुकाना पड़ता है, जिसे एक्सपेंस रेशियो कहा जाता है।

जब आप सिस्टमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान  के ज़रिए या एकमुश्त म्यूचुअल फंड में निवेश करते हैं, तो फंड हाउस यानी (आसेट मैनेजमेंट कंपनी ) आपके निवेश को मैनेज करने के लिए हर साल एक प्रतिशत शुल्क काटती है। यह शुल्क फंड के कुल (प्रबंधनाधीन संपत्ति ) के अनुपात में होता है।

क्या होता है एक्सपेंस रेशियो?

एक्सपेंस रेशियो उस राशि का प्रतिशत है जो फंड हाउस अपने संचालन, फंड मैनेजर की फीस, मार्केटिंग, डिस्ट्रीब्यूशन और अन्य प्रशासनिक खर्चों की पूर्ति के लिए वसूलता है। उदाहरण के तौर पर, यदि किसी फंड का एक्सपेंस रेशियो 1.5% है, और आपने ₹1 लाख निवेश किया है, तो हर साल ₹1,500 आपके रिटर्न से काट लिए जाएंगे।

क्यों जरूरी है इसे समझना?

लंबे समय में यह छोटा सा चार्ज आपके कुल रिटर्न को प्रभावित कर सकता है। इसलिए किसी भी म्यूचुअल फंड स्कीम में निवेश से पहले उसका एक्सपेंस रेशियो जरूर देखें। आमतौर पर इंडेक्स फंड्स और ईटीएफ का एक्सपेंस रेशियो कम होता है, जबकि एक्टिव फंड्स का अधिक।

इसलिए निवेश से पहले एक्सपेंस रेशियो पर ध्यान देना आपकी कमाई को बेहतर बना सकता है।

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