आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस/आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल : 5 दिन में ही विधानसभा चुनाव का सबसे बड़ा और तनावभरा काम निपटाकर कांग्रेस ने भाजपा को पीछे छोड़ दिया। क्रिकेट के T-20 फॉर्मेट की स्टाइल में दो शॉट में ही 230 में से 229 प्रत्याशी घोषित कर दिए।
गुरुवार रात 11:39 बजे कांग्रेस ने पहली लिस्ट के बाद बची 86 सीटों की जगह 88 प्रत्याशी घोषित किए। 88 इसलिए, क्योंकि पार्टी को तीन सीटों पर पहली लिस्ट के उम्मीदवार बदलने पड़े और एक पर घोषित नहीं किया। अब सिर्फ बैतूल जिले की आमला सीट का मामला बचा है।
भाजपा टिकटों का टेस्ट मैच ही खेल रही है। टिकट बांटने की शुरुआत करने के दो महीने बाद भी पार्टी में ‘मंथन’ जारी है। भाजपा ने पहली लिस्ट चुनाव की घोषणा से पहले 17 अगस्त को जारी कर चौंकाया था। इस बार चौंकाने की बारी कांग्रेस की थी।
MP में कांग्रेस के 88 प्रत्याशियों की दूसरी लिस्ट देखने के लिए यहां क्लिक करें
10 सवालों के जवाब में समझते हैं कांग्रेस की दूसरी लिस्ट की खास बातें…
दल बदलने वालों को कितनी तवज्जो दी?
पूरी तरह स्थानीय समीकरण का ध्यान रखा। भाजपा से आए 5 नेताओं को टिकट दिए गए। रीवा जिले की सेमरिया सीट पर पार्टी के पास कोई मजबूत दावेदार नहीं था तो 24 घंटे पहले पार्टी में आए पूर्व विधायक अभय मिश्रा पर भरोसा कर लिया। निवाड़ी से अमित राय के बारे में कहा जा रहा है कि उनकी तो अभी पार्टी की प्राथमिक सदस्यता लेने की औपचारिकता भी पूरी नहीं हुई। वे BJP से निष्कासित हुए थे। नौ महीने पहले BJP में वापसी हुई। अब कांग्रेस उम्मीदवार हैं। कांग्रेस ने नर्मदापुरम से पूर्व विधानसभा अध्यक्ष सीतासरन शर्मा के भाई गिरिजाशंकर शर्मा को प्रत्याशी बनाया है।
पूर्व मुख्यमंत्री कैलाश जोशी के पुत्र दीपक जोशी भाजपा में अपनी उपेक्षा से खफा होकर कांग्रेस में शामिल हुए थे। शिवराज सरकार में मंत्री रहे दीपक जोशी की परंपरागत सीट बागली है, लेकिन उन्हें चुनौतीपूर्ण खातेगांव सीट दी है। बदनावर में भाजपा के बागी पूर्व विधायक भंवरसिंह शेखावत पहले ही ऐलान कर चुके थे कि वे चुनाव लड़ेंगे, भले ही भाजपा टिकट दे या नहीं? उनकी इच्छा कांग्रेस ने पूरी कर दी है। उनका मुकाबला मंत्री राजवर्धन सिंह दत्तीगांव से होगा।
आखिर कांग्रेस ने एक सीट पर प्रत्याशी क्यों घोषित नहीं किया?
यह सीट बैतूल जिले की आमला है, जहां से डिप्टी कलेक्टर निशा बांगरे चुनाव की दावेदारी कर रही हैं। अब यह तय है कि कांग्रेस उन्हें यहां से चुनाव लड़ाना चाहती है, लेकिन निशा चुनाव से पहले सरकार से लड़ रही हैं। सरकार के खिलाफ बगावती तेवरों के साथ वे इस्तीफा दे चुकी हैं, लेकिन सरकार चाहती है कि वे नौकरी करें, राजनीति नहीं।
विभागीय जांच का हवाला देते हुए उनके इस्तीफे को स्वीकार नहीं किया है। निशा भी पीछे हटने को तैयार नहीं हैं। दो दिन पहले सुप्रीम कोर्ट ने जबलपुर हाईकोर्ट को आदेश दिए हैं कि वह निशा के इस्तीफे के मामले में जल्द फैसला करें। अब हाईकोर्ट के फैसले का इंतजार है। निशा के पक्ष में फैसला आता है तो वे कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ेंगी।
6 विधायकों के टिकट क्यों काटे?
कांग्रेस ने दूसरी लिस्ट में मौजूदा 6 विधायकों को बेटिकट कर दिया है। इनमें तीन तो चंबल-ग्वालियर के हैं, जबकि दो मालवा-निमाड़ और एक भोपाल के हैं। सुमावली से विधायक अजब सिंह कुशवाह को प्रॉपर्टी के एक मामले में सजा हो चुकी है। उनकी जगह कुलदीप सिकरवार को टिकट दिया है।
मुरैना से राकेश मावई का टिकट कटने की वजह पिछले महीने ग्वालियर में गुर्जर आंदोलन के दौरान हुआ उपद्रव है। इस मामले में मावई के खिलाफ FIR दर्ज है। उपचुनाव में जीते मावई की सर्वे रिपोर्ट भी उनके खिलाफ गई। गोहद से मेवाराम जाटव और सेंधवा के विधायक ग्यारसी लाल रावत सर्वे में पिछड़ गए।
उज्जैन जिले के बड़नगर से विधायक मुरली मोरवाल को बेटे की वजह से टिकट गंवाना पड़ा। बेटा रेप का आरोपी है। कांग्रेस ऐसे में भाजपा को सवाल पूछने का मौका नहीं देना चाहती है। ब्यावरा में रामचंद्र दांगी की जगह पुरुषोत्तम दांगी को प्रत्याशी बनाया गया है। सर्वे में पुरुषोत्तम रामचंद्र पर भारी पड़े। रामचंद्र दांगी पिता के निधन के बाद 2020 में उपचुनाव जीतकर विधायक बने थे।
भोपाल उत्तर का टिकट आरिफ अकील के परिवार के खाते में ही गया है। उनकी जगह पुत्र आतिफ को टिकट दिया है। आरिफ अकील भी यही चाहते थे, इसलिए माना जाए कि उनका टिकट नहीं कटा है।