सीएनएन सेंट्रल न्यूज़ एंड नेटवर्क–आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस / आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल : दिल्ली हाईकोर्ट ने मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े एक मामले में महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। कोर्ट ने कहा- ED की छापेमारी में इन्वेस्टिगेशन के 365 दिन के भीतर अगर आरोप साबित नहीं होता है तो प्रीवेन्सन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग केस (PMLA) के तहत जब्त की गई संपत्ति को वापस लौटाना होगा।

कोर्ट ने यह फैसला भूषण पावर एंड स्टील लिमिटेड (BPCL) के महेंद्र कुमार खंडेलवाल की दायर याचिका पर सुनाया। महेंद्र कुमार ने अपनी याचिका में कहा था कि ED ने छापेमारी के दौरान रिकॉर्ड दस्तावेज समेत सोने और हीरे की ज्वेलरी भी जब्त की थी, जिसकी कीमत 85 लाख रुपए से ज्यादा है।

ED ने यह छापेमारी फरवरी 2021 में की थी लेकिन अभी तक जब्त की हुई चीजों का नहीं लौटाया।

याचिका पर सुनवाई के दौरान जस्टिस नवीन चावला ने कहा कि ED की इन्वेस्टिगेशन में 365 दिन के भीतर किसी अपराध में कोई शख्स आरोपी साबित नही होता है तो PMLA के सेक्शन 8(3) के तहत संपत्ति को सीज करने का टाइम पीरियड लैब्स हो जाता है। ऐसे में जब्त की गई संपत्ति को वापस उस व्यक्ति को लौटा देनी चाहिए जिससे इसे जब्त किया गया था।

महेंद्र कुमार की जब्त संपत्ति लौटाए ED

हाई कोई ने ED को आदेश दिया कि वे 19 और 20 अगस्त 2020 को की गई छापेमारी के तहत याचिकाकर्ता से जब्त किए दस्तावेज, डिजिटल आइटम्स, संपत्ति और दूसरी चीजें उसे लौटाएं।

क्या है PMLA कानून?

प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट यानी PMLA को आम भाषा में समझें तो इसका मतलब है- दो नंबर के पैसे को हेरफेर कर ठिकाने लगाने वालों के खिलाफ कानून। ये एक्ट मनी-लॉन्ड्रिंग को रोकने, मनी-लॉन्ड्रिंग से प्राप्त या उसमें शामिल संपत्ति को जब्त करने और उससे जुड़े या उसके प्रासंगिक मामलों के लिए प्रावधान करने के लिए है।

PMLA के तहत ED को आरोपी को अरेस्ट करने, उसकी संपत्तियों को जब्त करने, उसके द्वारा गिरफ्तारी के बाद जमानत मिलने की सख्त शर्तें और जांच अधिकारी के सामने रिकॉर्ड बयान को कोर्ट में सबूत के रूप में मान्य होने जैसे नियम उसे ताकतवर बनाते हैं।

PMLA, 2002 में NDA के शासनकाल में बना था। ये कानून लागू हुआ 2005 में कांग्रेस के शासनकाल में, जब पी. चिदंबरम देश के वित्त मंत्री थे। PMLA कानून में पहली बार बदलाव भी 2005 में चिदंबरम ने ही किया था।