आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस/आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज G20 की वर्चुअल समिट की अध्यक्षता करेंगे। इससे पहले भारत ने 9-10 सितंबर को दिल्ली स्थित भारत मंडपम में G20 की मेजबानी की थी। जिसमें दुनिया के तमाम राजनेता शामिल हुए थे।
तब PM मोदी ने ब्राजील के राष्ट्रपति लूला डा सिल्वा को अध्यक्षता सौंपते वक्त कहा था- इस मीटिंग में हमारी ये जिम्मेदारी है कि जो सुझाव आए हैं, उनको भी एक बार फिर देखा जाए कि उनकी प्रगति में गति कैसे लाई जा सकती है।
मेरा प्रस्ताव है कि हम नवंबर के अंत में G20 समिट का एक वर्चुअल सेशन और रखें। उस सेशन में हम इस समिट के दौरान तय विषयों की समीक्षा कर सकते हैं। इसी को लेकर आज G20 के सभी देश वर्चुअली हिस्सा लेंगे।
भारत-कनाडा रिश्ते में खटास के बाद मोदी-ट्रुडो का आमना सामना
सितंबर में भारत में आयोजित जी20 मीटिंग में कनाडा के PM जस्टिन ट्रुडो भी आए थे। तब PM मोदी और ट्रूडो की बातचीत भी हुई थी।
यह भी पहली बार होगा जब कनाडाई PM जस्टिन ट्रूडो सितंबर में भारत से ओटावा लौटने के कुछ दिनों बाद दोनों देशों के बीच खटास के बाद PM मोदी के आमने-सामने होंगे। चीन की तरफ से एक बार फिर राष्ट्रपति शी जिनपिंग हिस्सा नहीं लेंगे। उनकी जगह प्रधानमंत्री ली कियांग बैठक में वर्चुअली जुड़ेंगे।
पुतिन दो साल बाद पहली बार जी20 में हिस्सा लेंगे
रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन दो साल बाद पहली बार जी20 में उपस्थित होंगे। वहीं अमेरिकी राष्ट्रपति जो बिडेन थैंक्स गिविंग के कारण उपस्थित नहीं होंगे और उनकी जगह ट्रेजरी सेक्रेटरी जेनेट येलेन इस बैठक में हिस्सा लेंगी।
मीटिंग का मुद्दा- विकास का एजेंडा
भारत इस मीटिंग में विकास के एजेंडे को केंद्र में रखने पर जोर देगा। भारत के शेरपा अमिताभ कांत ने कहा- जी20 की हमारी सफल मेजबानी के बाद से, दुनिया ने कई घटनाओं को देखा है और कई नई चुनौतियाँ सामने आई हैं। हालांकि, विकास मुख्य एजेंडा होगा और हम विकास के मुद्दे पर ध्यान केंद्रित करेंगे, नेता अन्य मुद्दों पर चर्चा कर सकते हैं।
विदेश सचिव विनय क्वात्रा ने कहा कि नेताओं द्वारा चर्चा किए जाने वाले मुद्दों को पहले से तय करना उचित नहीं होगा, क्योंकि भारतीय अधिकारियों ने सितंबर में मीटिंग के बाद से कई मुद्दों पर हुई प्रगति को लिस्टेड किया है।
9 और 10 सितंबर को हुई थी G20 समिट दिल्ली में 9 और 10 सितंबर को चली G20 समिट में दुनियाभर के नेता एक दूसरे से मिले। भारत मंडपम में इसका सफल आयोजन किया गया। G20 सम्मेलन के घोषणापत्र पर सभी देशों ने सहमति जताई। इसमें संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में स्थायी सदस्यता को लेकर सवाल उठाया गया। इसके अलावा सभी देशों के साथ भारत की द्विपक्षीय वार्ता हुई। अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन ने कहा कि इस G20 ने उम्मीदें बढ़ा दी हैं। ये संगठन जटिल से जटिल समस्याओं को भी हल कर सकता है।
साझा घोषणा पत्र पर सहमति
शनिवार को दूसरे सेशन की शुरुआत में PM मोदी ने बतौर अध्यक्ष सभी सदस्य देशों की सहमति से नई दिल्ली डिक्लेरेशन पारित किया। डिक्लेरेशन पास होने के बाद विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा- सभी देशों ने नई दिल्ली घोषणा पत्र मंजूर किया है। सभी लीडर्स ने माना है कि G20 राजनीतिक मुद्दों को डिस्कस करने का प्लेटफॉर्म नहीं है। घोषणा पत्र में यूक्रेन जंग का 4 बार जिक्र हुआ है।
जयशंकर से टेररिज्म और अफ्रीकी यूनियन को G20 में शामिल किए जाने पर भी सवाल हुए। इस पर विदेश मंत्री ने कहा- आप इस समिट का बाली समिट से कंपैरिजन न करें। बाली एक साल पहले था, अब नई दिल्ली है। यूक्रेन मुद्दे और फूड सिक्योरिटी जैसे मसलों का 7 पैराग्राफ में जिक्र किया गया है। मोदी ने जकार्ता और इसके पहले भी अपने सहयोगी नेताओं से बातचीत (यूक्रेन का नाम नहीं लिया) की थी। अफ्रीकी यूनियन के प्रेसिडेंट (सेनेगल के राष्ट्रपति) पिछले साल बाली में मोदी के पास आए थे। तब उन्होंने मोदी से कहा था कि हमें G20 में जगह क्यों नहीं मिलती? मुझे याद है तब प्रधानमंत्री ने उनसे कहा था- मैं आपको नई दिल्ली में G20 की सदस्यता दिलाने की गारंटी देता हूं।
जयशंकर से चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के न आने पर भी सवाल किया गया। इस पर जयशंकर ने कहा- हमें लगता है कि हर देश को ये हक है कि वो किस लेवल पर शिरकत करना चाहता है। इसके मायने इससे ज्यादा नहीं होने चाहिए। चीन ने काफी सपोर्ट किया है।