केरल में रोमन कैथोलिक चर्च रविवार को होने वाली होली मास की एक प्रथा पर बंट गए हैं। कई ईसाई संगठनों की ओर से हिंसक विरोध इतना तेज हो गया कि 35 चर्च बंद कर दिए गए हैं। इनके बाहर पुलिस तैनात की गई है। पुलिस का कहना है कि शांति बहाल होने के बाद ही चर्चों को प्रार्थना के लिए खोला जाएगा।

क्या है पूरा मामला
दरअसल, ईसाई समुदाय की मान्यता है कि भगवान ने 6 दिन में दुनिया को बनाया था और 7वें दिन आराम किया था। इसी तरह ईसाई भी रविवार को ईसा मसीह की पूजा करते हैं। इसी पूजा को होली मास कहा जाता है। रोमन कैथोलिक चर्च की स्थानीय विंग सिरो मालाबार ने निर्देश जारी करते हुए कहा है कि इसकी प्रैक्टिस के दौरान पादरी और भक्तों का मुंह पूर्व दिशा की ओर होगा, लेकिन केरल के मॉडर्न कैथोलिक ईसाइयों का दावा है कि ये बात कहीं नहीं लिखी। इससे अनुयायी पादरी को न तो देख पाते हैं और न ही उससे संवाद कर पाते हैं। इनका दावा है कि हम पादरी को भगवान के रूप में देखते हैं। भगवान हमारी तरफ नहीं देखे, ये बात ठीक नहीं है।

सबने नहीं माना आदेश, 2 हजार साल पुराने चर्च की साख दांव पर
नया निर्देश लागू करने वाला सिरो मालाबार कैथोलिक चर्च करीब 2 हजार साल पुराना है। इसे केरल का सबसे पुराना चर्च माना जाता है। लेकिन इसके नए निर्देश के खिलाफ हो रहे हिंसक विरोध बताते हैं कि चर्च की साख दांव पर लगी हुई है। यदि इस निर्देश की पालना नहीं की जाती है तो चर्च का प्रभुत्व खात्मे की ओर बढ़ सकता है।

स्थानीय चर्च भी सर्वोच्च परिषद के सामने मजबूर
सिरो मालाबार रोमन कैथोलिक चर्च की सर्वोच्च परिषद के आगे मजबूर हैं। दरअसल, सर्वोच्च परिषद ने ही नया निर्देश जारी किया था। क्षेत्रीय इकाइयों की जिम्मेदारी है कि वे इसे लागू कराएं। ऐसे में सिरो मालाबार संकट में फंस गया है। एक तरफ लोग विरोध जता रहे हैं, दूसरी तरफ आदेश लागू कराने का दबाव भी है।

नियम ये कि आधे समय अनुयायियों को देखा जाए
ईसाई समुदाय के विशेषज्ञों के मुताबिक, नियम ये कहता है कि प्रार्थना के दौरान पादरी को आधे समय अनुयायियों की ओर देखना चाहिए। बाकी समय पूर्व दिशा की ओर देखना चाहिए। हालांकि, मॉडर्न ईसाइयों ने इसे मानने से भी इनकार कर दिया। उनका कहना है कि 50 साल से जो प्रथा चली आ रही है, वही चलेगी।

पोप से अनुमति के बावजूद आदेश मानने का दबाव
अल्माया मुन्नेट्टम संगठन का कहना है कि हमने पोप फ्रांसिस से अनुमति ली थी कि हमारे चर्च में लोगों की ओर देखकर ही प्रार्थना होगी। लेकिन अब हम पर नया आदेश मानने का दबाव बनाया जा रहा है। साथ ही उन्होंने चेतावनी दी कि ये आदेश वापस नहीं लिया गया तो रोमन कैथोलिक चर्च को गंभीर परिणाम भुगतने होंगे।