सीएनएन सेंट्रल न्यूज़ एंड नेटवर्क–आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस /आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल: मॉरीशस के फाइनेंशियल सर्विसेज कमिशन (FSC) ने हिंडनबर्ग रिसर्च के आरोपों का जवाब दिया है। FSC ने स्टेटमेंट में कहा कि मॉरीशस शेल कंपनियों को बनाने की अनुमति नहीं देता है। इतना ही नहीं इसे ‘टैक्स हेवन’ के रूप में लेबल भी नहीं किया जाना चाहिए।
मॉरीशस में नॉन-बैंकिंग फाइनेंशियल सर्विसेज सेक्टर और ग्लोबल बिजनेस के लिए बनाए गए रेगुलेटर के रूप में FSC ने अपने लेजिसलेटिव फ्रेमवर्क की मजबूती पर भी जोर दिया। FSC ने कहा, ‘मॉरीशस में ग्लोबल बिजनेस कंपनियों के लिए एक मजबूत फ्रेमवर्क है।’
मॉरीशस इंटरनेशनल बेस्ट प्रैक्टिसेज का पालन करता है
FSC से लाइसेंस प्राप्त सभी ग्लोबल बिजनेस कंपनियों को फाइनेंशियल सर्विसेज एक्ट की सभी रिक्वायरमेंट्स को पूरा करना आवश्यक है। इस कंप्लायंस की FSC द्वारा बारीकी से निगरानी की जाती है, जो सुनिश्चित करता है कि मॉरीशस इंटरनेशनल बेस्ट प्रैक्टिसेज का पालन करता है।
FSC ने बयान में यह भी बताया कि मॉरीशस को इकोनॉमिक कॉरपोरेशन एंड डेवलपमेंट यानी OECD के निर्धारित स्टैंडर्ड्स के तहत दर्जा दिया गया है।
IPE प्लस फंड और IPE प्लस फंड-1, मॉरीशस में बेस्ड नहीं
हिंडेनबर्ग रिपोर्ट में किए गए दावों पर FSC ने कहा कि ‘IPE प्लस फंड और IPE प्लस फंड-1, जिनके नाम अमेरिकी शॉर्ट सेलर ने अपनी रिपोर्ट में दिए हैं। यह दोनों फंड FSC के लाइसेंसधारी नहीं है और मॉरीशस में बेस्ड भी नहीं है।
हिंडनबर्ग बोला- SEBI चीफ ने सफाई में आरोप स्वीकारे
2 दिन पहले अमेरिकी शॉर्ट सेलर हिंडनबर्ग ने कहा था कि हमारी रिपोर्ट पर SEBI चेयरपर्सन माधबी बुच ने प्रतिक्रिया देते हुए कई चीजें स्वीकार की हैं, जिससे कई नए सवाल खड़े हो गए हैं।
हिंडनबर्ग ने कहा था- बुच के जवाब से ये पुष्टि होती है कि उनका निवेश बरमुडा/मॉरिशस के फंड में था। ये वही फंड है जिसका इस्तेमाल गौतम अडाणी के भाई विनोद अडाणी करते थे। आरोप है कि विनोद अडाणी इन फंड्स के जरिए अपने ग्रुप के शेयरों की कीमत बढ़ाते थे।
हिंडनबर्ग रिसर्च ने ये भी कहा था कि मार्केट रेगुलेटर SEBI को अडाणी मामले से संबंधित इन्हीं ऑफशोर फंडों की जांच करने का काम सौंपा गया था, जिसमें माधबी पुरी बुच की ओर से निवेश किया गया था। यह स्पष्ट रूप से हितों के टकराव का एक बड़ा मामला है।
हिंडनबर्ग ने शनिवार को पब्लिश अपनी रिपोर्ट में दावा किया था कि माधबी पुरी बुच और उनके पति धवल बुच की अडाणी ग्रुप से जुड़ी ऑफशोर कंपनी में हिस्सेदारी है।