सीएनएन सेंट्रल न्यूज़ एंड नेटवर्कआईटीडीसी इंडिया ईप्रेस / आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल : वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने श्वेत पत्र पर लोकसभा में चल रही बहस में जवाब दिया। उन्होंने कहा कि पहले की सरकार (UPA) सत्यानाश करके गई, हमने सुधारा। आज ये लोग मगरमच्छ के आंसू बहा रहे हैं। कोल माइंस एक्ट पास करवाया। डिस्ट्रिक्ट मिनिरल फंड स्टैबलिश किया। विदेशी फंडिंग की शुरुआत हुई, क्योंकि हमने 100 फीसदी FDI कर दी।

सीतारमण ने ये भी कहा कि 2020 से 9 बार ऑक्शन में कोल ब्लॉक का एलोकेशन हुआ। पीछे के दरवाजे से मेरे भाई, मेरे बहन, मेरे भतीजे को एलोकेशन नहीं दिया है और आज ये हमें क्रोनी कैपिटलाइजेशन पर ज्ञान देते हैं।

59 पेज का श्वेत पत्र पेश किया था

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने गुरुवार को लोकसभा में भारतीय अर्थव्यवस्था पर 59 पेज का श्वेत पत्र पेश किया। इसमें बताया गया है कि जब 2014 में मोदी सरकार ने सत्ता संभाली, तो अर्थव्यवस्था नाजुक स्थिति में थी। इकोनॉमिक मिसमैनेजमेंट और करप्शन था।

श्वेत पत्र के अनुसार, UPA सरकार के हतोत्साहित करने वाले निवेश माहौल ने घरेलू निवेशकों को विदेशों में अवसर तलाशने के लिए प्रेरित किया। बार-बार नीतिगत बदलावों के कारण इंडस्ट्रियलिस्ट्स ने इंडोनेशिया और ब्राजील जैसे देशों में निवेश का रुख किया।

2014 में जब मोदी सरकार आई तो उसने कठोर फैसले लिए, जिससे अर्थव्यवस्था पटरी पर आई। देश की अर्थव्यवस्था अब दुनिया की पांच नाजुक अर्थव्यवस्थाओं से शीर्ष पांच अर्थव्यवस्थाओं में पहुंच गई है। हमारा लक्ष्य 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाना है।

मोदी सरकार ने तीन पार्ट में श्वेत पत्र पेश किया है…

पार्ट A: UPA सरकार में भारत की आर्थिक स्थिति

पार्ट B: UPA सरकार के विभिन्न घोटाले

पार्ट C: मोदी सरकार ने कैसे इकोनॉमी बदली

पार्ट A से जुड़ी बड़ी बातें:

  1. पांच साल महंगाई चरम पर रही, खामियाजा आम आदमी ने भुगता

UPA सरकार को अधिक सुधारों के लिए तैयार एक स्वस्थ अर्थव्यवस्था विरासत में मिली थी, लेकिन उसने अपने दस साल में इसे नॉन परफॉर्मिंग बना दिया। 2004 में जब UPA सरकार ने अपना कार्यकाल शुरू किया तो इकोनॉमी 8% की दर से बढ़ रही थी। पहले 5 साल यानी 2004 से 2008 तक इकोनॉमी तेजी से बढ़ी और महंगाई भी कम थी।

फिर 2008 के ग्लोबल फाइनेंशियल क्राइसिस के बाद किसी भी तरह से हाई इकोनॉमिक ग्रोथ को बनाए रखने के लिए UPA सरकार ने आर्थिक नींव को गंभीर रूप से कमजोर कर दिया। ऐसी ही एक नींव जिसे UPA सरकार ने बुरी तरह कमजोर कर दिया था, वह थी प्राइस स्टेबिलिटी। 2009 से 2014 के बीच महंगाई चरम पर रही और इसका खामियाजा आम आदमी को भुगतना पड़ा।