आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस/आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल : इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू। कोई इन्हें जादूगर कहता है, कोई किंग बीबी तो कोई मिस्टर सिक्योरिटी। बिना बहुमत के भी वो सरकार बनाने में कामयाब रहे। इसकी वजह से उनके बारे में कहा जाता है कि ये हार के जबड़े से जीत को खींच लाते हैं।

यही वजह है कि वो 16 साल से इजराइल के प्रधानमंत्री हैं। वो इजराइल जिसका वजूद ही यहूदियों की सुरक्षा पर टिका है। 7 अक्टूबर को उसी इजराइल पर बड़ा हमला हुआ। इसमें 1400 से ज्यादा लोग मारे गए। इजराइल 30 दिन से जंग लड़ रहा है। PM नेतन्याहू कहते हैं- ये जंग लंबी और दर्दनाक होगी पर हम इसे जीतेंगे।

ऐसे में सवाल उठता है कि क्या हर हारी बाजी जीतने वाले नेतन्याहू जंग के बाद भी प्रधानमंत्री रह पाएंगे?

सबसे पहले इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के बारे में जानिए…

1910 में पोलैंड के वारसा शहर में बेंजियन नेतन्याहू नाम के एक यहूदी शख्स का जन्म हुआ। ये वो दौर था, जब दुनियाभर में यहूदियों के खिलाफ जुल्म हो रहे थे। यहूदी अपने लिए एक अलग देश चाहते थे।

नतीजा ये हुआ कि 1920 में बेंजियन नेतन्याहू का परिवार बाकी यहूदियों की तरह फिलिस्तीन के जाफा शहर पहुंच गया। 1944 में नेतन्याहू ने इजराइल की एक यहूदी लड़की तजिला सेगल से शादी कर ली। जाफा में रहते हुए 1949 में तजिला और बेंजियन को एक बेटा पैदा हुआ, जिसका नाम बेंजामिन नेतन्याहू रखा गया।

1967 में अपनी पढ़ाई खत्म करने के बाद बेंजामिन सेना में भर्ती हो गए। बेंजामिन इजराइली सेना में करीब 5 साल तक रहे। इस दौरान उन्होंने 1967 में अरब देशों के खिलाफ जंग भी लड़ी। जंग के दौरान उनकी वीरता को देखते हुए जल्द ही उन्हें यूनिट कैप्टन बना दिया गया।

1972 में जब सबेना फ्लाइट 571 को हाइजैक कर लिया गया तो बेंजामिन ने अपनी जान पर खेलकर बंधकों को आजाद कराया था। इसके बाद से ही वो देश के लिए हीरो बन गए। इसी साल नौकरी से छुट्टी लेकर वह पढ़ाई के लिए अमेरिका चले गए। वहां से लौटे तो 1982 में उन्हें इजराइल की ओर से अमेरिका में राजदूत बना दिया गया। दो साल बाद जब 1984 में उन्हें यूनाइटेड नेशन का राजदूत बनाया गया तो वो खूब मशहूर हुए।

उन्होंने दुनियाभर के मंचों पर जाकर मजबूती से इजराइल का पक्ष रखा। इस दौरान उनकी पहचान इजराइल के फायरब्रांड राजदूत के तौर पर होने लगी। कुछ समय बाद ही नेतन्याहू अपने देश लौट आए और राजनीति में शामिल हो गए। साल 1996 में इजराइली प्रधानमंत्री यित्जाक राबिन की हत्या के बाद हुए चुनाव हुए। इसमें बेंजामिन नेतन्याहू पहली बार इजराइल के सबसे युवा प्रधानमंत्री बने।